तुषार सिंचन प्रणाली

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“एल्यूमीनियम या पीवीसी पाइप को जोड़ कर स्प्रिंकलर नोजल की मदत से पानी के दबाव का उपयोग कर उसे बारिश जैसे सभी फसलो पर एक जैसा गिराए जाने की प्रणाली को तुषार सिंचन कहा जाता है।”

इस प्रणाली में अधिक से अधिक नोज़ल निश्चित गति से घुमाने की सुविधा होती है। उचित हॉर्सपॉवर और दबाववाले पंपसेट का उपयोग करने पर यह प्रणाली अधिक उपयुक्त होती है। इलेक्ट्रिक मोटर / डीज़ेल इंजन, पंप, सक्शन डिलीवरी पाइप्स, उपमुख्य नल लैटरल्स, नोज़ल, एंडप्लग, बेंड इ। साहित्य तुषार सिंचाई के लिए आवश्यक होते है। स्प्रिंकलरको एक बड़ा और दूसरा छोटा एैसे दो नोज़ल्स जुड़े हुए होते हैं। बड़ा नोझल गोलाकार क्षेत्र में दूर तक एक जैसी मात्रा में पानी फैलाते है, छोटा नोज़ल निकटवर्तीय क्षेत्र पर पानी फैलाता है। पानी अधिक दबाव के साथ पाईपसे नोजलद्वारा बौछार के स्वरूप में बाहर निकालता है। अगर नोज़ल पर चौ.ईंच 40 पौंड इतने दबाव पर कार्य करता है, तो सामान्यतः 240 सेंटीमीटर व्यास के गोलाकार क्षेत्र पर पानी भेजेगा। तुषार सिंचन आराखडा तैयार करने के लिए जमीन का प्रकार, पानी, नदी, कुवा उपलब्ध जल, कुल मौजूद पानी हम कितने घंटे तक निकाल सकते हैं, फसल का प्रकार, सिंचन क्षेत्र की लम्बाई-चौड़ाई आदि चीजों की जानकारी प्राप्त करने पर उचित तरीके से तुषार सिंचन को तकनीकी रूप से अछितरह फिक्स करना आसान हो जाता है।

तुषार सिंचन का उपयोग करने के लिए उचित स्प्रिंकलर का चयन करे। साथ ही हर घंटे बाहर आनेवाला पानी या उसकी गती हमेशा उस जमीन के पानी की पोषण क्षमता से कम होना चाहिए। उपलब्ध पानी मी मात्रा को ध्यान में रखकर स्प्रिंकलर का चयन करे। तुषार सिंचन सेट शुरू करने से पहले जानकारी पुस्तिका के अनुसार या विशेषज्ञों के निर्देशों का पालन करे। सभी नट-बोल्ट उचित तरीके से बैठे या नहीं यह देख ले। सभी पाइप्स साफ़ रखें। सेट बंद करते समय पहले गेट वाल्व धीरे से बंद करे और फिर पंप बंद करें। स्प्रिंकलर को ऑइल या ग्रिस न लगाए।

तुषार सिंचन के फायदे:-

  • इसमें मजदूरी का खर्च कम आता है।
  • फसलो के उत्पादन में वृद्धि होती है।
  • तुषार सिंचन प्रणाली में पानी की बचत होती है।
  • प्रवाही सिंचनसे अधिक सिंचन क्षमता मिलती है।
  • तुषार सिंचन प्रणाली लगभग सभी फसलों के लिए उपयुक्त होती है। इसमें पानी की 25 से 35% बचत होती है।
  • हर तरफ एकजैसे मात्रा में पानी दे सकते है।
  • पानी बारिश के जैसा हर फसलो पर गिरने के कारण कीटक, रोग धोकर निकलते है।
  • द्रवरूप रासायनिक उर्वक तुषार-सिंचनके माध्यम से देते आते है।
  • उर्वक फसलों के जड़ो तक रहते है। परिणामतः उर्वको का कार्यक्षम उपयोग होकर उसमे बचत होती है।
  • ठिबक सिंचन प्रणाली के मुकाबले पर एकड़ का खर्च कम आता है।

 

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2 Comments
  1. shersingh ranawat says

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  2. […] तुषार सिंचन प्रणाली […]

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