गन्ने की खेती

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भारत में गन्ना (Sugarcane) प्रमुख रूप से नगदी फसल के रूप में उगाया जाता है| गन्ना (Sugarcane) की खेती भारत में प्रतिवर्ष लगभग 30 लाख हेक्टेयर भूमि मई की जाती है| लेकिन क्षेत्रफल की दृष्टी से इसका उत्पादन कम है| गन्ना भारत में चीनी का एक प्रमुख स्रोत है|

किसान भाई कुछ बातों पर ध्यान केन्द्रित कर के यदि गन्ने की खेती करे तो इसका उत्पादन अच्छा ले सकते है| यहां कुछ महत्वपूर्ण बाते है| जिनको उपयोग में लाकर किसान भाई गन्ने की अच्छी पैदावर ले सकते है|

गन्ना की खेती के लिए किस्में और जलवायु

  1. गन्ना (Sugarcane) की प्रमुख किस्में- सीओजे- 83, 211, 79, 35, 64, और 82, सीओ- 1148, 7717, 1253, 419, 6304, 611, 8145, 84, 770, 1007, 7321, 62399, 6812, 449, 527, 715, 419, 7717 और 1158, सीओएच- 767, सीओएस- 758,
  2. गन्ने की बुवाई के समय तापमान 30 से 35 डिग्री सेंटीग्रेट होना चाहिए, साथ ही वतावरण शुष्क होना चाहिए| गन्ना (Sugarcane) की खेती सभी प्रकार की भूमि में की जा सकती है, लेकिन दोमट और चिकनी भूमि सर्वोतम मानी जाती है| गन्ने के खेत में पानी निकासी की व्यवस्था अच्छी होनी चाहिए|

खेत की तैयार और मिट्टी उपचार

  1. खेत के लिए पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करे, और 2 से 3 जुताई देशी हल या कल्टीवेटर से करनी चाहिए, उसके बाद पट्टा लगाकर खेत का अच्छी तरह पलेवा देना चाहिए|
  2. गन्ना (Sugarcane) की फसल को दीमक से बचाने के लिए क्लोरोफयरिफास 25 किलोग्राम चूर्ण प्रति हेक्टेयर में बुरककर अच्छी तरह मिट्टी में मिलाना चाहिए|  या 5 लीटर क्लोरोफयरिफोस 900 से 1000 लिटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए|
  3. गन्ना (Sugarcane) बसंतकालीन बीजाई का समय 15 फरवरी से 15 मार्च तक उपयुक्त होती है| शीतकालीन बीजाई का समय सितंबर के अंत से अक्तूबर माह तक अच्छा रहता है| गन्ना 60 से 75 सेंटीमीटर की दुरी से मिलाकर लगाना चाहिए, और नमी संरक्ष्ण के लिए भारी सुहागा लगाना चाहिए|

जल और खाद उर्वरक प्रबंधन (Water and Fertilizer Management) 

  1. गन्ने की फसल को मौसम के अनुसार लगभग 15 से 18 सिंचाई की आवश्यकता होती है| पहली सिंचाई आवश्यकतानुसार या 4 से 5 सप्ताह बाद करनी चाहिए| बारिश के समय पौधों को मिट्टी चढाए और गिरने से बचाने के लिए एक दुसरे को बांध देना चाहिए|

2 गन्ना (Sugarcane) की अच्छी उपज पाने के लिए रोपाई से पहले गोबर खाद का प्रयोग करे, इसके साथ साथ 150 किलोग्राम नाइट्रोजन, 80 किलोग्राम फास्फोरस, 40 किलोग्राम पोटाश और 25 किलोग्राम जिंक सल्फेट प्रति हेक्टेयर प्रयोग करना चाहिए| इनमें रोपाई से पहले 1/3 भाग नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और जिंक की पूरी मात्रा डालनी चाहिए| नाइट्रोजन का बचा हुआ भाग फसल रोपाई के 60 से 70 दिन बाद डालनी चाहिए|

खरपतवार नियन्त्रण (Weed Control) 

गन्ना (Sugarcane) की जड़ो में नमी बनाए रखने के लिए और फसल को खरपतवार से छुटकारा दिलाने के लिए निराई गुड़ाई हर सिंचाई के बाद फावड़ा, कस्सी या अन्य यंत्र द्वारा करनी चाहिए| या फीर खरपतवार नियन्त्रण के लिए पैन्ड़ेमेथिलिन 30 ईसी 3.5 लिटर 700 से 900 लिटर पानी में घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करना चाहिए, जिसे खरपतवार उगेगा ही नही|

रोग और कीट रोकथाम (Disease and Insect Prevention)

  1. गन्ना में लगने वाले रोग काना रोग, कण्डुआ रोग, सडन रोग, पर्णदाह रोग, वर्णन रोग, लालधारी पत्ती रोग और उकठा रोग प्रमुख होते है| इनकी रोकथाम के लिए रोग रोधी किस्मों का प्रयोग करना चाहिए, बीज को उपचारित कर के बुवाई करनी चाहिए, रोगी पौधों को खेत से उखाड़ कर मिट्टी में दबा देना चाहिए| फसल चक्र को अपनाएं, पारियों को रोग रहित करने के लिए गर्म पानी से उपचार करे और वर्षा के पानी को ज्यादा दिन खेत में ना खड़ा रहने दे|
  2. गन्ने (Sugarcane) को लगने वाले किट दीमक, कन्सुआ, अंकुर बेधक, तना बेधक, ग्रास हापर और शल किट प्रमुख है| इनकी रोकथाम के लिए सिंचाई की समुचित व्यवस्था करे, सुखी पत्ती व अन्य खरपतवार को जला दे, इसके साथ दीमक और कण्डुआ किट के लिए 4 से 5 लिटर क्लोरोफयरिफास और 1 लिटर क्युनाल्फोस का 1000 से 1200 लिटर पानी का घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर में छिड़काव करना चाहिए और अन्य रोगों के लिए 2 लिटर मोनोक्रोटोफास और 1 लिटर रोगोर 900 से 1000 लिटर पानी में घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर की हिसाब से छिड़काव करना चाहिए|

 

फसल कटाई और पैदावार (Harvesting and Production)

  1. गन्ना (Sugarcane) की कटाई उसकी किस्म, आयु और परिपक्वता पर निर्भर करती है| आप को लगे की फसल अब तैयार है तो उसकी तुरंत कटाई छटाई कर के मिल में डाल देना चाहिए और यदि आप उसका गुड बना रहे है तो गन्ने की आवश्यकतानुसार ही कटाई करनी चाहिए|
  2. गन्ना की पैदावार उसकी किस्मों पर आधारित होती है| लेकिन उपरोक्त विधि अपनाने के बाद जल्दी पकने वाली फसल की 80 से 90 टन और देर से पकने वाली 95 से 120 टन तक पैदावार होनी चाहिए|

तो इस प्रकार से किसान भाई उपरोक्त बातोँ के अनुसार खेती कर के अच्छी पैदावार अपनी फसल की ले सकते है|

 

 

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