स्प्राउटिंग ब्रोकली की खेती

0

ब्रोकली भी एक गोभी वर्गीय पौष्टिक एवं विशेष सब्जियों में से है । इस सब्जी के पौष्टिक मूल्य का आंकलन किया जाये तो प्रथम स्थान प्राप्त होगा । इसके सेवन से हृदय रोग भी नियन्त्रित होते हैं । ब्रोकली के अन्तर्गत एक मुख्य फूल या शीर्ष (Main Head) होता है लेकिन ऊपर की पत्तियों के साथ अन्य फूल (Head) भी बनते हैं जिसको स्प्राउटिंग-ब्रोकली (Sprouting Broccoli) कहते हैं । इसमें वृद्धि फूल गोभी की तरह ही होती है । अन्तर केवल मुख्यत: यह होता है कि ब्रोकली का हेड या फूल हरे रंग (Green Colour) का होता है । जबकि फूल गोभी में सफेद फूल (White Head) होता है । यह फसल शरद ऋतु में बोई जाती है । हेड के फूल (Bud) मोटी नहीं होनी चाहिए । यह सब्जी छोटी वड्स की उत्तम होती है । मुख्य शीर्ष (Main Head) को सर्वप्रथम काटा जाता है । तत्पश्चात् उप-शीर्ष (Sub Head) शीघ्र वृद्धि करते हैं जो मुख्य शीर्ष की अपेक्षा छोटे होते हैं । इन शीर्षों के डंठल लम्बे तथा मुलायम होते हैं जो तोड़ने में आसानी से टूट जाते हैं ।

इस प्रकार से स्प्राउटिंग-ब्रोकली से पत्तियों के डंठल व तने से छोटी कलियां (Buds) बनती रहती हैं जो वृद्धि करके बड़े शीर्ष के रूप में वृद्धि करती है । कुछ ब्रोकली के शीर्ष हरे-जामुनी (Green Purple) रंग के होते हैं । इस तरह से कई बार ब्रोकली को समय-समय पर काटा जाता है जो अगेती बाजार में 100-150 रुपये प्रति किलो मिलती है तथा आमतौर पर 50-60 रुपये प्रति किलो मिलती रहती है । इस सब्जी में पोषक तत्वों की भी अधिक मात्रा होती है l

स्प्राउटिंग ब्रोकली की खेती के लिए आवश्यक भूमि व जलवायु

इस सब्जी के लिए कोई विशेष भूमि की आवश्यकता नहीं होती बल्कि यह सभी प्रकार की भूमि में पैदा की जाती है । लेकिन सर्वोत्तम भूमि दोमट या हल्की बलोई दोमट रहती है जिसका पी.एच. मान 60-75 के बीच का हो । जीवांशयुक्त भूमि का होना नितान्त आवश्यक है ।

ब्रोकली ठन्डे मौसम की फसल है जिसे ठन्डी जलवायु की आवश्यकता होती है । 10-20 डी०सेग्रेड तापमान उत्तम वृद्धि हेतु अच्छा माना जाता है । गर्म जलवायु उचित नहीं होती है ।

स्प्राउटिंग ब्रोकली की खेती के लिए खेत की तैयारी 

ब्रोकली की फसल के लिये 2-3 बार मिट्‌टी पलटने वाले हल से जुताई करें क्योंकि खरीफ की फसल के अभिशेष गल-सड़ जायें अर्थात् खेत को खरपतवार व घास रहित कर लें! आवश्यकतानुसार जुताई करके खेत को भली-भांति भुरभुरा कर तैयार कर लें । जिससे खेत में खरपतवार ना उगें तथा ढेले रहित खेत भी होना चाहिए ।

स्प्राउटिंग ब्रोकली की उन्नत किस्में

ब्रोकली की किस्में अधिक नहीं है लेकिन कुछ किस्में हैं जिन्हें उगाया जाता है ।

  1. ग्रीन हेड किस्म (Green Head)- इस किस्म के शीर्षक ग्रीन (हरे) रंग के होते हैं जो ऊपर से जुड़े हुए होते हैं ।
  2. इटैलियन ग्रीन (Italiyan Green)- यह भी हरे रंग की भली-भांति शीर्ष दिखाई देते हैं जो ऊपर से कुछ खुले हुए दिखाई देते हैं ।
  3. डी.पी.जी.वी.-1 (D.P.G.V-1, Varietiy)- यह किस्म विकसित की गई है । जिसका रंग कुछ हल्के हरे जैसा होता है । लेकिन नीचे से शीर्ष हरे रंग के होते हैं ।
  4. संकर (F1) कोई भी लगा सकते हैं तथा विदेशी (Improted Seed) कोई भी बोयें |
  5. डी.पी.पी.बी.-1 (D.P.P.B-1)- इस किस्म के शीर्ष कुछ जामुनी होते हैं ।

बीज की मात्रा / प्रति हैक्टर

ब्रोकली का बीज भी अन्य गोभी की तरह प्रयोग होता है । बीज की मात्रा 400-500 ग्राम प्रति हैक्टर, 200 ग्राम प्रति एकड़ तथा 40-50 ग्राम बीज प्रति बीघा या 1000 वर्ग मी. के क्षेत्र के लिये पर्याप्त होता है । बीज फूल, गोभी पत्ता व गांठ गोभी के समान होता है ।

बीज की बुवाई का समय 

बीज की बुवाई पौधशाला में सितम्बर के मध्य से अक्टूबर के माह में करें तथा खेत या क्यारियों में बीज बुवाई के 20-25 दिन बाद यानि अक्टूबर के अन्तिम सप्ताह व नवम्बर में अवश्य करें क्योंकि देरी से बोने पर शीर्ष गुणवत्ता वाले तैयार नहीं होते ।

खाद एवं उर्वरकों की मात्रा 

इस सब्जी के लिए गोबर की सड़ी खाद 8-10 टन प्रति हैक्टर तथा नाइट्रोजन 40 किलो, सुपर फास्फेट 80 किलो तथा पोटाश 70 किलो प्रति हैक्टर की आवश्यकता पड़ती है । यदि नाइट्रोजन, कैल्सियम अमोनियम नाइट्रेट का प्रयोग किया जाये तो फसल के परिणाम उत्तम मिलते हैं । गोबर की खाद, सुपर फास्फेट व पोटाश को खेत की तैयारी के समय ही देना चाहिए । नाइट्रोजन की आधी मात्रा भी खेत तैयारी के समय तथा शेष मात्रा को दो बार में खड़ी फसल में देना उचित रहता है ।

पौध की रोपाई 

जब पौध फूल गोभी की तरह 8-10 सेमी. लम्बी हो जाये तो पंक्ति से पंक्ति की दूरी 60-45 सेमी. तथा पौधे से पौधे की दूरी 45 सेमी. रखनी चाहिए । सम्भवत: पौध की रोपाई शाम को करें तथा तुरन्त पानी दें । पौध की गहराई 3-4 सेमी. रखें ।

सिंचाई 

प्रथम सिंचाई रोपाई के तुरन्त बाद करें तथा अन्य सिंचाई 10-12 दिन के अन्तराल से करते रहें । इस प्रकार से शरदकाल में 15 दिन के अन्तराल से सिंचाई करनी चाहिए ।

निकाईगुड़ाई

पौध रोपने के 15 दिन बाद प्रथम गुड़ाई करें तथा जंगली घास होने पर निकाल दें । इस प्रकार से 2-3 बार निकाई-गुड़ाई की आवश्यकता पड़ती है । इसी समय कोई पौधा मर गया तो रोपाई कर देनी चाहिए । पौधों पर हल्की इसी समय मिट्‌टी भी चढ़ा देनी चाहिए जिससे पौधा न गिरे ।

शीर्षों की कटाई

शीर्षों को काटने या तोड़ने का भी एक समय है । हैड की कलियां (Buds) बड़ी या खुलने से पहले ही कच्चे नर्म फूलों या हैडस को काटना चाहिए अन्यथा ब्रोकली की गुणवत्ता नष्ट हो जाती है । इन तैयार शीर्षों को 12-15 सेमी. लम्बे डंठल के साथ काट लेना चाहिए ।

यह सब्जी किचन गार्डन के लिये अति उत्तम रहती है । शरद ऋतु की फसल होने से छतों, बॉलकनी तथा नीचे क्यारियों में आसानी से उगाई जा सकती है ।

पैदावार 

ब्रोकली के एक हैड को काटने के बाद पौधों में नई-नई शाखाएं निकल आती हैं । इस प्रकार से पौधे का प्रथम हैड लगभग 200-400 ग्रा. तथा अन्य छोटे हैड 100-150 ग्रा. तक के होते हैं । इस प्रकार से एक पौधे से औसतन 800-1000 ग्रा. या एक किलो तक हैक (ब्रोकली) मिलते हैं तथा प्रति हैक्टर 160-200 क्विंटल उपज मिल जाती है ।

कीट व बीमारियां

कीट पिछेती फसल में लगते हैं जैसे-एफिडस, कैटरपिलर आदि । इनकी रोकथाम हेतु रोगोर, मेटासीड तथा नुवान 1 ml / L के घोल का छिड़काव करें । बीमारी में अधिकतर पत्तियों पर धब्बे हो जाते हैं जो काले भूरे रंग के बन जाते हैं । इनकी रोकथाम के लिये फफूंदीनाशक-डाइथेन एम-45 का 2 ग्रा. प्रति लीटर का घोल बनाकर छिड़काव करें ।



महत्वाची सूचना :- सदरची माहिती हि कृषी सम्राट यांच्या वैयक्तिक मालकीची असून आपणास इतर ठिकाणी ती प्रसारित करावयाची असल्यास सौजन्य:- www.krushisamrat.com असे सोबत लिहणे गरजेचे आहे.

सदर सत्रासाठी आपण ही आपल्या कडील माहिती / लेख इतर शेतकऱ्यांच्या सोयीसाठी [email protected] या ई-मेल आयडी वर किंवा 8888122799 या नंबरवर पाठवू शकतात. आपण सादर केलेला लेख / माहिती आपले नाव व पत्त्यासह प्रकाशित केली जाईल.



Leave A Reply

Your email address will not be published.