मृदा परीक्षण

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हम जिस खेत से और जमीन से फसल लेते है, उस जमीन का प्रकार कौनसा है और उस जमीन में पोषण की मात्रा कितनी है | इन सबके बारे में अगर जानना हो तो कम से कम 2 साल में एक बार मृदा परीक्षण करना जरुरी होता है | मृदा परीक्षण कृषि क्षेत्र में रासायनिक या जैविक रसायनों का विश्लेषण है | इसके द्वारा, खेतों में ली जा रही फसल निश्चित कर सकते है और कम खर्च में हम उत्पादन भी बढा सकते है | साथ ही फसल को दी जाने वाली खाद कि मात्रा भी निश्चित कर सकते है | मृदा परीक्षण कि नोंद रखनेवाली पत्रिका का नाम ‘मृदा आरोग्य पत्रिका’ है | इस में, नाइट्रोजन और फॉस्फरस पोषक तत्व परीक्षण के लिए दी गयी मिट्टी में कितनी मात्रा में है, ये देखा जाता है | इसके अलावा, अॅसिडिक अॅसिड और ग्राउंड अॅसिड-अम्लीय निर्देशांक इसकी भी जांच की जाती है।

फसलों के विकास में अठारह पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है | सामू PH ,विदयुत वाहकता EC, चुनखड़ी CaCO3, Organic Carbon, नत्र N, स्फुरद P, पालश K, कॉपर Cu, फेरस(आयर्न) Fe, झिंक Zn, मॅगनीज् Mn, कॅल्शियम Ca, मॅग्निशियम Mg, सल्फर S, सोडियम Na इसमे से मिट्टी में अगर एक भी कम या जादा हो गया तो उसका परिणाम तुरंत ही फसल पर दिखता है| जैसे कि, पत्ते पिले पडना, पत्ते गिरना शिरा के अलावा अन्य फसलों का विकास पूरा नहीं होता है | ये पोषक तत्व मिलने के बाद अपनेआप ही फसलो कि विकास दर में बढत होती है | विशेषत: इस पोषक तत्व का फसल बढने के कार्य में प्रत्यक्ष सहभाग होता है | इसलिए मृदा परिक्षण करना आवश्यक है | इसके द्वारा किसानो को पता चलता है की, मिट्टी में कौनसे पोषक तत्वो का प्रमाण कम अथवा जादा है |

फायदे :-
• मिट्टी परीक्षण के परिणामस्वरूप, हमें मिट्टी की उर्वरता और उत्पादकता के बारे में जानकारी मिलती है और कितनी मात्रा में पोषक तत्वों को मिलाना है इसकी जानकारी मिलती है।

• मिट्टी की जाँच करके, हम खेत कि मिट्टी में पोषक तत्व / फसल सामग्री की सही मात्रा को समझते हैं। तदनुसार, उर्वरक और अन्य पोषक तत्वों को संबोधित किया जा सकता है और यह फसलों की पैदावार को बढ़ाता है।

• वह गैरवाजवी खाद के दुरुपयोग पर नियंत्रण रखता है इस के द्वारा, खेत में फसल की उचित योजना से दो गुना अधिक वित्तीय लाभ प्राप्त हो सकता है।

• फसल की बुवाई से पहले, मिट्टी के पोषक तत्वों की मात्रा के बारे में पूरी जानकारी मिलती है |

• फसलों का रोपण इसके अनुसार व्यवस्थित किया जा सकता है।

• पोषक तत्वो कि संतुलित मात्रा देकर अनावश्यक लागत से बचा जा सकता है |

• जमीन का सामू नियंत्रित (6.5 से 7.5) रख के फसल कि पोषण तत्वो कि शोषणक्षमता बढा सकते है |

• मृदा परीक्षण से फसल के विकास के लिए आवश्‍यक पोषण तत्वो का समतोल रखा जाता है |

• जमीन फसल कि बढोतरी के लिए अच्छी है या नही ये समझ आता है |

मृदा परीक्षण का उद्देश:-
१) मुख्य और महत्वपूर्ण उद्देश्य यह निर्धारित करना है कि मिट्टी परीक्षण से मिट्टी के विकास के लिए कौन से पोषक तत्वों की कमी है और इसे हटाने के लिए क्या आवश्यक है।

२) मृदा परीक्षण और फसल उत्पादन के संबंध में, फसल पर जमीन से कितने पोषक तत्व प्राप्त होते हैं और खाद, हरी खाद, सेंद्रीय उर्वरक आदि द्वारा कितनी मात्रा में पोषक तत्व देना चाहिए ये जानकारी मिलती है |

३) मिट्टी के नमूने प्रयोगशाला में सामू PH , विदयुत वाहकता EC, चुनखड़ी CaCO3 , सेंद्रिय कर्ब OC, नत्र N, स्फुरद P, पालश K, कॉपर Cu, फेरस (आयर्न) Fe, झिंक Zn, मॅगनीज् Mn, कॅल्शियम Ca, मॅग्निशियम Mg, सल्फर S, सोडियम Na इसके लिए परीक्षण किया जाता है |

४) विद्राव्य क्षार के मात्रा से फसल के विकास पर होने वाले प्रभाव का अनुमान लगाया जा सकता है |

 

इस सत्र के लिए हम किसानों की सुविधा के लिए, यह जानकारी अन्य किसानों की सुविधा के लिए लेख आप [email protected] ई-मेल आईडी या 8888122799 नंबर पर भेज सकते है, आपके द्वारा सबमिट किया गया लेख / जानकारी आपके नाम और पते के साथ प्रकाशित की जाएगी।

 

 

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