थ्रेशर का रखरखाव

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फसलों की गहाई में मशीन (थ्रेशर)  का बड़ा योगदान है। गहाई मशीनों के उपयोग से समय पर गहाई पूरी करके पैदावार की क्षति को जहां काफी हद तक कम किया जा सका है वहीं गहाई का कार्य जो पारम्परिक तरीके से बहुत श्रमसाध्य हुआ करता था, अब बहुत आसान हो गया है। महीनों तक चलने वाला गहाई का कार्य अब कुछ दिनों में ही सम्पन्न हो जाता है। देश में गहाई मशीनों की संख्या लगभग 25 लाख से ज्यादा है। गेहूं की गहाई के लिये पूर्णत: यंत्रीकृत गहाई यंत्र उपलब्ध है। परंतु दलहनी एवं तिलहनी फसलों में यांत्रिक विधि द्वारा गहाई करने में नुकसान प्रतिशत ज्यादा है साथ ही यांत्रिक गहाई का किसानों में अभी सीमित प्रचलन है। क्योंकि इन फसलों की गहाई में विशेष जरूरतों का ध्यान रखना पड़ता है। बीजों में कम नुकसान और टूट-फूट से बचाव के लिये गहाई मशीन का सही चयन एवं समायोजन आवश्यक है। कभी-कभी सिलेण्डर की जाली को बदलने के साथ-साथ गहाई मशीन की गति भी बदलने की आवश्यकता पड़ती है। विभिन्न फसलों जैसे सोयाबीन, मक्का, ज्वार, बाजरा आदि तथा तिलही व दलहनी फसलों जैसे अलसी, सरसों, मूंग, चना, उड़द आदि की गहाई उच्च क्षमता वाले गहाई मशीन से किया जा सकता है। गहाई मशीन का चयन, प्रचालन, समायोजन एवं रखरखाव के लिये किसानों को प्रशिक्षित करना जरूरी है।

प्रारंभिक जांच के आधार पर कुछ संशोधनों को शामिल करने के बाद व्यवसायिक रूप से उपलब्ध कील दांत प्रकार के मल्टीक्रॉप थ्रेशर का इस्तेमाल सबसे उपयुक्त पाया गया है। इसमें थ्रेसिंग सिलेण्डर का व्यास लगभग 580 मि.मी. और लंबाई लगभग 326 मि.मी. होता है। थ्रेसिंग सिलेण्डर में छत्तीस से चौसठ नोंकदार छड़ें लगी होती हैं। जिसमें से प्रति पंक्ति में 6 से 8 कीलें होती हैं। सोयाबीन एवं दलहनी फसलों की गहाई के लिये 16 मि.मी. की रॉड की बनी 6 से 8 नोंकदान कीलों को बरकरार रखा जाता है जैसे कि 1 कील प्रति पंक्ति। सिलेण्डर परिधि पर कीलों की व्यवस्था अक्षीय होती है। हवा खींचने की दो उप केन्द्री प्रकार के अस्पिरेटर लगे होते हैं जिसमें से एक में 4 ब्लेड और दूसरे में 3 ब्लेड क्रमश: 90 एवं 120 पर लगी होती है। प्रथम अस्पिरेटर चलनी से सीधे जाली के नीचे गिरने वाले भूसे के छोटे-बड़े हिस्सों को अलग करता है। दूसरे अस्पिरेटर का काम द्वितीय चरण की सफाई के लिये होता है। दूसरे अस्पिरेटर का काम द्वितीय चरण की सफाई के लिये होता है। यह अनाज के बाहर जाने से ठी पहले मोटे भूसे एवं गांठों को खींच लेता है। घुमावदार जाली सिस्टम औल दोलन फ्रेम में क्रमश: जाली बहलने और स्कीन बदलने की प्रणाली होती है। दोलनों का आयाम बदलता रहता है। मुख्य द्वार से शुद्ध अनाज बाहर निकलने से पहले ऊपर लगी जाली अनाज से बड़े भूसे को जबकि नीचे की जाली अनाज से छोटे कचरे या भूसे और धूल आदि को अलग कर देती है। तथा मोटर स्थापित करने के लिये मोटर का स्टेण्ड भी लगा होता है। इसमें ट्रैक्टर से संचालन के लिये सार्वभौमिक शाफ्ट का भी प्रावधान है।

इस गहाई यंत्र की कार्यक्षमता विभिन्न फसलों में जैसे सोयाबीन में 8-10 क्विं./घं., गेहूं में 16 से 20 क्विं./घं., राया में 8 से 10 क्विं./घं., चने में 6 से 8 क्विं./घं., और मूंग एवं उड़द में 4 से 5 क्विं./घं., पाई गयी है। थ्रेशर की गहाई क्षमता 98-99′ बिना गाहे अनाज का प्रतिशत 1.5-2′ और दिखाई देने वाला नुकसान 1′ पाया गया है। औसत कुल नुकसान लगभग 5′ होता है। टूट-फूट कम करने के लिये मूंग, उड़द में सिलेण्डर की चाल 300 चक्कर प्रति मिनट जबकि सोयाबीन फसल के लिये 500 चक्कर प्रति मिनट पर रखी जाती है। मूंग में टूट-फूट कम करने के लिये 2 (4 में से) काटने वाले ब्लेड को निकाल देते हैं। मूंग में टूट-फूट 5.0′ से 2.0′ प्राप्त हुई. गहाई क्षमता और सफाई क्षमता को निर्धारित सीमा में देखा गया। दानों की टूट-फूट एवं भूसे की साईज को सिलेण्डर एवं जाली के बीच के जगह के आधार पर समायोजित करते हैं। भूसे एवं गांठों को अनाज से अलग करने के लिये सिलेण्डर की गति को कम या ज्यादा करते हैं।

कस्टम हायरिंग हेतु गहाई मशीन का उपयोग देश के लगभग प्रत्येक भाग में होता है। कस्टम हायरिंग के लिये बड़े हॉर्स पॉवर के हड़म्बा थ्रेशर एवं मल्टीक्रॉप थ्रेशर स्व-उद्यमियों के लिये फायदेमंद होते हैं। इन थ्रेशरों का मूल्य लगभग रु. 70,000/- से रु. 1,20,000/- थ्रेशर के परिचालन में लगभग रु. 350-500 प्रति घंटा खर्च होता है। यह गहाई मशीन एक साल में अपनी लागत लगभग वापस कर देता है। अनुमानित प्रति वर्ष बचत रु. 86,000/-।

थ्रेसर की देखरेख

  •  गहाई के पश्चात गहाई मशीन को खाली चलायें जिससे मशीन के अंदर से अनाज के दाने, भूसा एवं डंठल आदि बाहर निकल जाएं।
  • गहाई मशीन को शक्ति स्त्रोत से अलग कर लें तथा चलनियों से सारा भूसा, डंठल और अनाज आदि अलग कर लें।
  •  गहाई मशीन में जहां से हवा खिंची या फेंकी जाती है उसको साथ कर लें।
  •  रबर के सभी पार्ट्स जैसे एवं पट्टे बगैरह निकाल कर सुरक्षित जगह रख लें।
  •  मशीन को साफ एवं सूखी जगह पर रखें और धूल एवं जंग से बचाने के लिये कवर से ढंके।

मल्टीक्रॉप थ्रेशर का उपयोग करते समय जरूरी सुरक्षा व सावधानियां:
गहाई मशीन पर कार्य करते समय होने वाली दुर्घटनाओं के प्रमुख कारको में इस मशीन के तेज गति एवं भारी संवेग के साथ घूमने वाले कलपुर्जे हैं। सर्वाधिक दुर्घटनाएं हाथों के गहाई धुरे की चपेट में आने से होती है। भारत सरकार द्वारा सन् 1983 में खतरनाक मशीन अधिनियम (विनियमन) पारित किया गया था। जिसके आधार पर इन मशीनों पर फसल डालने की परनाला 90 से.मी. की लम्बाई (सूपा)तथा ऊपर से 45 ढका जाना कानूनन जरूरी माना गया है। ताकि व्यक्ति का हाथ गहाई धुरे तक न पहुंच सके। गहाई मशीन दुर्घटनाओं से बचाव के लिये भारत सरकार द्वारा प्रस्तावित परनाला हापर तथा हड़म्बा गहाई मशीन खरीदने वाले किसान भाई फसल वापिस खींचने वाला यंत्र जरूर लगायें। गहाई मशीन के आसपास की जगह खुली तथा बिना किसी रूकावट की होना चाहिए तथा गहाई मशीन पर काम करते समय ढीले कपड़े खासतौर पर धोती, दुपट्टा, खुली बांह वाली कमीज तथा घड़ी या कड़ा ना पहने तथा पीशाफ्ट के ओ.टी.आसपास से न गुजरे। धूल तथा भूसा से बचने के लिये नाक पर कपड़े या मास्क तथा आंखों की सुरक्षा के लिये चश्में का प्रयोग करें। काम करते समय बात नकरें या किसी और तरफ ध्यान न बाटें तथा गहाई मशीन चलते समय किसी भी पुर्जे को खोलने या कसने का प्रयास करें।

गहाई मशीन पर होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिये अच्छी मशीन का चयन ही नहीं अपितु दुर्घटना घटने का सही कारण बताने वाले का योगदान भी जरूरी है। यदि किसी व्यक्ति की असावधानी या फिर मशीन में कमी के कारण कोई दुर्घटना घटती है तो यह जानकारी मशीन निर्माता, कृषि वैज्ञानिक, या इंजीनियर को अवश्य दें, जिससे वह मशीन में सुधार ला स के और भविष्य में कोई अन्य व्यक्ति दुर्घटना का शिकार ना हो।

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