कैसे करे चंदन कि खेती

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मिट्टी का चयन व तैयारी :

चंदन कि खेती के लिए काली, लाल चिकनी बलुई मिट्टी, अच्छी होती है । मिनरल्स और नमी युक्त मिट्टी में इसका विकास कम होता है। नम मिट्टी जैसे की अच्छी तरह से सूखा जलोढ़ मिट्टी चंदन की खेती के लिए अच्छी नहीं मानी जाती है क्योंकि इसके वजह से पेड़ों में हार्टवूड तेल की कमी हो जाती है। पुरानी मिट्टी पर इसकी खेती करने से पेड़ में से बेहतर तेल निकाले जा सकते है जबकी ये मिट्टी जल-जमाव का सामना नहीं कर पाती है ।

पौधे को रोपने से पहले खेत की 2 से 3 बार अच्छे से गहरी जुताई करनी पड़ती है। जुताई हो जाने के बाद 2x2x2 फिट का गढ्ढा खोद कर उसे कुछ दिनों के लिए सुखने के लिए छोड़ दिया जाता है।

जलवायु :

चंदन कि खेती के लिए जिस क्षेत्रों का जलवायु मध्यम वर्षा, भरपूर मात्रा में धूप और शुष्क मौसम की लंबी अवधि वाले है उसे अच्छा माना गया है। वातावरण के बदलाव के कारण निमाड़ का मौसम इसकी खेती के लिए उचित होता है । इसके पौधे के विकास के लिए उचित तापमान 12° c to 30°c के बीच होता है । इसकी खेती के लिए ५०० से ६२५ मिमी. तक annual rainfall की आवश्यकता होती है।

पौधे का रोपण :

एक एकड़ भूमि में कुल 435 पौधों लगाए जा सकते है , पौधों से पौधों की दूरी 10 फुट की होनी चाहिए । बीज रोपण हेतु गड्ढ़े का आकार (45 सेमी * 45सेमी * 45 सेमी) होना चाहिए । आमतौर पर, चंदन मई और अक्टूबर के बीच महीनों में प्रत्यारोपित किया जाता है। स्थानीय किस्मों के प्रदूषण को रोकने के लिए, इन के बीजों को लगाने के लिए केवल शहरी क्षेत्रों को हीं चुने ना की संरक्षित जंगल कि जगह  को  ।

खाद प्रबंधन :

चन्दन की खेती के लिए जैविक खाद की अधिक जरुरत नहीं होती है। शुरुवात में फसल की वृद्धि के समय खाद की जरुरत पड़ती है। लाल मिट्टी के 2 भाग, खाद के 1 भाग और बालू के १ भाग को खाद के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है । खाद भी पौधों के लिए बहुत अच्छा पोषण प्रदान करता है।

सिंचाई प्रबंधन :

बरसात के समय तो चन्दन के पेड़ काफी तेजी से बढते है लेकिन गर्मी के मौसम में इसकी सिंचाई अधिक करनी होती है। सिंचाई मिट्टी में नमी सोकने  की क्षमता वातावरण पर निर्भर करती है।

शुरुवात में बरसात के बाद दिसंबर से मे तक सिंचाई करते रहना चाहिए । रोपण के बाद जब तक बीज का 6 से 7 सप्ताह में अंकुरण शुरू ना हो जाये तब तक सिचाईं को रोकना नहीं चाहिए। चन्दन की खेती में पौधों के विकास के लिए मिट्टी का हमेशा नम और जल भराव होना जरुरी होता है । अंकुरित होने के बाद केवल एक दिन छोडके पौधो पर हीं सिंचाई करे । 

खरपतवार :

चन्दन की खेती करते समय, चंदन के पौधे की पहले साल में सबसे अधिक देखभाल की आवश्यकता होती है । पहले साल में पौधों के इर्द-गिर्द की काफी कर के खरपतवार को हटा देना चाहिए । यदि आवश्यक हो तो दूसरे वर्ष में भी साफ-सफाई कर देना उचित रहता है । किसी भी तरह का पर्वतारोही या जंगली छोटा कोमल पौधा के चारों ओर हो तो कटौती कर के उन्हें हटा दें। 

कीट व रोग नियंत्रण :

“सैंडल स्पाइक” नाम का एक रोग है जो की चन्दन के पेड़ का सबसे बड़ा दुश्मन कहलाता है। इस रोग के लगने से चन्दन के पेड़ सभी पत्ते ऐंठा कर छोटे हो जाते हैं साथ हीं पेड़ टेढ़े मेढ़े हो जाते है । अब तक इस रोग के बचाव के लिए सभी प्रयत्न Fail साबित हुए हैं। अभी तक इसका कोई इलाज नहीं इजाद हुआ है, पर मेरा मानना है की प्रकृति में ही सब कुछ उपाय और उसका इलाज उपलब्ध है।

जब भी आप चंदन के पेड़ लगाये, उसके 5 से 7 फीट की दुरी पर एक नीम का पौधा लगा दे ताकि कई तरह के किट-पतंग से चंदन के पेड़ की सुरक्षा हो सके | कोशिश करे की हर 3 चंदन के पेड़ के बाद एक नीम का पौदा जरुर लगा दे, और खर पतवार को पौधे के आस पास नहीं जमा होने दें | 

 

फसल की कटाई :

चंदन के पेड़ की जड़े भी बहुत ख़ुशबूदार होते है इसलिए इसके पेड़ को काटने के बजाय जड़ सहित उखाड़ लिया जाता है । पौधे को रोपने के 5 साल बाद से चन्दन के रसदार लकड़ी बनना शुरू हो जाते है ।

चंदन के पेड़ को काटने के बाद उसकी लकड़ी मे से दो भाग निकलते है एक जिसे रसदार लकड़ी कहा जाता है और दूसरा सूखी लकड़ी । दोनो ही लकड़ियों का किमत अलग – अलग होता है। चन्दन के पेड़ जब 14 से 15 साल के हो जाते है तब जा कर इसके पेड़ से लकड़ी प्राप्त की जाती है। पेड़ को जड़ सहित उखाड़ लेने के बाद इसे तुकडो में काट कर इससे हार्टवूड को अलग कर लिया जाता है । 

बाजार भाव :

आप को जान कर हैरानी होगी की आज के तारीख में 1 किलो चंदन कि किमत Rs 5,000 से 6,000 तक है। और इसकी मांग इतनी है की हमारे देश में ही इसकी आपूर्ति नहीं हो पाती है।  इसके अलावा चंदन की लकड़ी की मांग चायना, इंडोनेशिया, अमरिका और कई देशो में हैं |

एक परिपक्व चंदन के पेड़ का वजन 20 से लेकर 40 kg तक हो सकता है। उस अनुमान से, पेड़ की काट छाट के बाद भी आपको एक पेड़ से Rs 1 लाख से लेकर 2 लाख तक आसानी से मिल सकता है।

इस तरह अगर आप 100 चंदन के पेड भी लागाया करते है और उसमें से अगर 70 पेड भी बड़े हो जाते है तो आप 15 से 17 साल में एक करोड़पति बन सकते है। यह किसी भी बँक के फिक्स डीपोझीट या रीयल इस्टेट में निवेश से भी कई गुना आपको मुनाफा हो सकता है।

इसमें कोई दो राय नहीं है की चंदन कि खेती एक किफायती व्यापार है, अगर आप इसे पुरे जानकारी और धैर्य के साथ करे तो इससे अच्छा और कोई भी व्यापार में बिज़नेस नहीं है।

ऋण :

अब राष्ट्रीयकृत बैंक और को-ऑपरेटिव बैंक भी चंदन की लकड़ी वृक्षारोपण परियोजना के लिए बँक ऋण दे रही है।

नियम :

हमारे भारत में अलग अलग राज्य में चंदन के पेड के लिए अलग अलग नियम है।  साल 2,000 के पहले आम लोगों को चंदन को उगने और काटने की मनाही थी। और तो और, अगर आपके घर के पीछे चंदन का पेड़ है, तो उस पर आपका मालिकाना हक़ नहीं होगा, और अगर यह किसी कारण से चोरी हो गया, तब तो वन विभाग आपकी अच्छी खबर लेंगे।

परन्तु 2,000 साल के बाद, सरकार ने कई नियम में ढिलाई दी है, जिसके बाद पिछले 12 से 15 साल में कई किसान भाई गुजरात, आंध्रप्रदेश, उत्तराखंड और कई राज्यों में चंदन की खेती कर रहे है।

 

 

इस सत्र के लिए हम किसानों की सुविधा के लिए, यह जानकारी अन्य किसानों की सुविधा के लिए लेख आप [email protected] ई-मेल आईडी या 8888122799 नंबर पर भेज सकते है, आपके द्वारा सबमिट किया गया लेख / जानकारी आपके नाम और पते के साथ प्रकाशित की जाएगी।

1 Comment
  1. Kuldeep kumar says

    Do we have to take license to do sandal cultivation?

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