चुकंदर की उन्नत खेती कैसे करें

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चुकंदर की फसल पुरे भारत में विभिन्न उदेश्यों के लिए उगाई जाती है। यह गहरे लाल रंग का फल फल है। इसका प्रयोग सब्जी, रस, चीनी, चारा, सलाद और मानव रोग निवारण के लिए किया जाता है। चुकंदर पोषक तत्वों से भी भरपूर है जैसे- चीनी 9 से 15 प्रतिशत, प्रोटीन 1.5 से 2 प्रतिशत और कैल्शियम, मैग्नीशियम, अम्ल, आयोडीन, पोटाशियम, लोहा के साथ विटामिन सी, बी इत्यादि उपलब्द है।

जलवायु :

  1. इस फसल की लिए ना तो ज्यादा गर्मी और ना ही ज्यादा सर्दी सम जलवायु उपयुक्त रहती है। ज्यादा सर्दी और गर्मी का फसल पर बुरा प्रभाव पड़ता है| इसकी खेती पहाड़ी क्षेत्रों में भी सफलतापुर्वक की जा सकती है| चुकंदर की फसल के लिए 30 से 60 सेंटीमीटर वार्षिक वर्षा उपयुक्त रहती है| पौधों की वृद्धि के समय मौसम चमकीला और सम होना चाहिए| ज्यादा तापमान पर इसकी जड़ो में चीनी की मात्रा बढ़ने लगती है|
  2. चुकंदर की खेती किसी भी प्रकार की उपजाऊ मिट्टी में की जा सकती है| परन्तु इसके लिए सबसे उपयुक्त दोमट और बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त है| जहां पानी की निकासी की भी व्यवस्था होनी चाहिए|

चुकन्दर की खेती के लिए :

खेत की तैयारी :

 इस फसल की तैयारी उचित ढंग से करनी चाहिए यदि भूमि रेतीली है तो  2-3 जुताई करें तथा कुछ भारी हो तो पहली जुताई मिट्टी पलटने वालें हल से करें तथा अन्य 3-4 जुताई करके पाटा चलायें और मिट्‌टी को बिकुल भुरभुरी कर लें जिससे जड़ों की वृद्धि ठीक हो सके । तत्पश्चात् छोटी-छोटी क्यारियां बनायें ।

बगीचों में 3-4 गहरी जुताई-खुदाई करें । घास-घूस को बाहर निकालें तथा छोटी-छोटी क्यारियां बनायें । मिटटी को बारीक कर लें ।

 

किस्में और बीज की बुवाई :

 

  1. चुकंदर की किस्में इस प्रकार है जैसे- इग्लोपोली, ऐजे पोली, ईरो टाइप ई, एनपी पोली, मेरोबी मेरोक पोली, मेरोबी मेगना पोली, ब्रुश ई ट्रिप्लेक्स, रोमांस काया, बीजीडब्लू- 674, एमएसएच- 102, यूएसएच- 9, यूएस- 75 और यूएच- 35 इत्यादि प्रमुख है|
  2. बुवाई के समय बीज की मात्रा किस्म पर निर्भर करती है| इसमें एक अंकुर वाली किस्मों के लिए 5 से 7 किलोग्राम और बहु अंकुर वाली किस्मों के लिए 9 से 11 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर उपयुक्त रहता है| इसका बुवाई का समय 10 अक्तूबर से 15 नवम्बर रहता है| चुकंदर के लिए लाइन से लाइन की दुरी 50 से 60 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दुरी 25 से 30 सेंटीमीटर रखना अच्छा रहता है|

खाद और सिंचाई :

  1. हमेशा खाद मिट्टी की गुणवत्ता परिक्षण कराने के बाद ही आवश्यकतानुसार डालनी चाहिए| यदि परिक्षण नही करवाया है, तो 150 से 200 क्विंटल गोबर खाद या कम्पोस्ट खाद जुताई के समय खेत में डाले ताकि वह मिट्टी में अच्छे से मिल जाए| इसके साथ साथ 60 किलोग्राम नाइट्रोजन, 80 किलोग्राम फास्फोरस और 60 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टेयर आखरी जुताई के समय खेत में डालनी चाहिए|
  2. सिंचाई हमेशा मौसम पर निर्भर करती है, यदि बारिश नही होती है तो 10 से 15 दिन के अन्तराल पर सिंचाई करनी चाहिए या फिर आवश्यकतानुसार करनी चाहिए|

खरपतवार नियंत्रण और पौधों की छंटाई :

  1. इस फसल में खरपतवार के लिए पहली निराई गुड़ाई बुवाई के 25 से 35 दिन बाद करनी चाहिए, इसके बाद आवश्यतानुसार निराई गुड़ाई करनी चाहिए| यदि खरपतवारनाशी से खरपतवार पर नियन्त्रण चाहते है, तो 3 लिटर पेंडीमिथेलिन को 800 से 900 लिटर पानी में घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर फसल बुवाई से 2 दिन तक नम मिट्टी में छिड़काव करना चाहिए, जिसे की खरपतवार का जमाव ही नही होगा| यदि हुआ तो बहुत कम होगा|
  2. पहली निराई गुड़ाई के समय यदि आवश्यकता से अधिक पौधे है, तो उनकी छटाई करनी चाहिए|

रोग और किट रोकथाम :

  1. चुकंदर की फसल में दो तरह के रोग ज्यादा लगते है, जैसे पत्ती छेदक और जड़ या तना गलन रोग इनकी रोकथाम के लिए बीज को 2 ग्राम बाविस्टिन से प्रति किलोग्राम बीज को उपचारित कर के बोना चाहिए| रोगी पौधों को उखाड़ कर मिट्टी में दबा देना चाहिए| इसके साथ डाइथेन एम 45 प्रति हेक्टेयर 1 लिटर का 700 से 800 लीटर पानी में घोल बनाकर 10 से 15 दिन के अन्तराल में दो बार छिडकाव करना चाहिए|
  2. चुकंदर में मुख्यतः पत्ती काटने वाले कीड़े, विटल और सुंडी का प्रकोप होता है| इनकी रोकथाम के लिए 1.5 लिटर एंडोसल्फान या 1.5 लिटर मैलाथियान 2 प्रतिशत को 700 से 800 लिटर पानी में मिलाकर 10 से 15 दिन के अन्तराल में प्रति हेक्टेयर दो बार छिड़काव करना चाहिए|

फसल की खुदाई और पैदावार :

  1. यह फसल जब पकती है, तो पौधे के पत्ते पककर गिरने लगते है, 90 दिन के आसपास फसल की खुदाई कर सकते है| खुदाई से 10 से 15 दिन पहले सिंचाई रोक देनी चाहिए|
  2. अनुकूल मौसम और उपरोक्त विधि से खेती करने के पश्चात इसकी पैदावार 65 से 80 टन प्रति हेक्टेयर होनी चाहिए|

चुकंदर के गुण :

  • चुकंदर का जूस शरीर में खून बनाने की प्रक्रिया में उपयोगी होता है।
  • चुकंदर काजूस है पीलिया, हेपेटाइटिस, मतली के उपचार में लाभप्रद।
  • इसके जूस के नियमित सेवन सेकब्ज और बवासीर से बचा जा सकता है।
  • उच्च रक्तचाप, दिल और पांव की नसों के लिए भी उपयोगी हैचुकंदर का जूस।

चुकंदर स्वास्थ्य के लिए काफी लाभदायक सब्जी है। इसमें कार्बोहाइड्रेट और कम मात्रा में प्रोटीन और वसा पाया जाता है। इसका जूस सब्जियों में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। यह प्राकृतिक शुगर का सबसे अच्छा स्रोत है। आइये इस लेख में हम आपको विस्तार से बताते हैं चुकंदर के गुणों के बारे में।

समें सोडियम, पोटैशियम, फॉस्फोरस, कैल्शियम, सल्फर, क्लोरीन, आयोडीन, आयरन, विटामिन बी1, बी2 और सी पाया जाता है। इसमें कैलोरी काफी कम होती है। इसका  जूस कई बीमारियों के उपचार में लाभदायक होता है।

एनीमिया में :

चुकंदर का जूस मानव शरीर में खून बनाने की प्रक्रिया में उपयोगी होता है। आयरन की प्रचुरता के कारण यह लाल रक्त कोशिकाओं को सक्रिय और उनकी पुर्नरचना करता है। यह एनीमिया के उपचार में विशेष रूप से उपयोगी होता है। इसके सेवन से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।

पाचन के लिए :

चुकंदर का जूस पीलिया, हेपेटाइटिस, मतली और उल्टी के उपचार में लाभप्रद होता है। चुकंदर के जूस में एक चम्मच नींबू का रस मिलाकर इन बीमारियों में तरल भोजन के रूप में दिया जा सकता  है। गैस्ट्रिक अल्सर के उपचार के दौरान सुबह नाश्ते से पहले एक गिलास चुकंदर के जूस में एक चम्मच शहद को मिलाकर पियें।

कब्ज और बवासीर में

चुकंदर के नियमित सेवन से कब्ज से बचा जा सकता है। यह बवासीर के रोगियों के लिए भी काफी फायदेमंद होता है। रात में सोने से पहले एक गिलास या आधा गिलास जूस दवा के तौर पर पीना फायदेमंद होता है।

अन्य बीमारियों के लिए :

चुकंदर का जूस अकार्बनिक कैल्शियम को संग्रहित करने का सर्वश्रेष्ठ माध्यम है। इस कारण यह उच्च रक्तचाप, दिल की बीमारियों और पांव की नसों के लिए उपयोगी होता है। किडनी और पित्ताशय विकार में चुकंदर के रस में गाजर और खीरे के जूस को मिलाकर पीना उपयोगी होता है।

रोजाना चुकंदर का जूस पीनेके अनोखे फायदे :

सर्दियों में गाजर के साथ-साथ चुकंदर भी आसानी से मिल जाता है। चुकंदर से मिलने वाले फायदे इतने ज्यादा होते हैं जिनके कारण इसे एक सुपरफूड कहा जाता है। इसमें विटामिन ए, विटामिन सी, कैल्शियम और आयरन होता है और एक गिलास चुकंदर के रस में आमतौर पर 58 कैलोरी, 3 ग्राम कार्बोहाइड्रेट्स और 2 ग्राम प्रोटीन होता है। चुकंदर का रस आपकी सेहत के साथ आपके बालों और स्किन को किस तरह फायदा पहुँचाता है, आइये आपको बताते हैं।

त्वचा की सुरक्षा करता है – 

चुकंदर का रस पीने से आपकी त्वचा हाइड्रेट रहती है और डेड सेल्स की ऊपरी परत हटने से स्किन चिकनी और कोमल भी बनती है। इसके साथ ही चुकंदर में मौजूद विटामिन-सी त्वचा के टोन को सुधारता है और स्किन प्रॉब्लम्स को दूर करने के साथ पिगमेंटेशन और चेहरे के कालेपन को भी दूर करता है।

बढ़ती उम्र के लक्षण रोकें

 चुकंदर में एंटी-ऑक्सीडेंट्स गुण प्रचुर मात्रा में मौजूद होते हैं, इसी वजह से इसके इस्तेमाल से एंटी-एजिंग प्रभाव भी मिलते हैं। बढ़ती उम्र के लक्षणों को दूर रखने के लिए हफ्ते में एक बार चेहरे पर 10 मिनट के लिए चुकंदर का रस लगाएं और फिर धो लें। ऐसा करने से झुर्रियां और फाइन लाइन्स जैसे बढ़ती उम्र के संकेत कम होते चले जाएंगे।

बालों का झड़ना रोके

 बालों की सेहत के लिए पोटैशियम एक जरुरी पोषक तत्व है जिसकी कमी होने पर बाल झड़ने लगते हैं लेकिन चुकंदर का जूस पीकर आप अपने बालों की सेहत को बेहतर बना सकते हैं क्योंकि चुकंदर पोटैशियम का बहुत ही अच्छा स्रोत है।

लीवर की सुरक्षा करे – 

चुकंदर के रस में ग्लूटाथिओन नामक एंटी-ऑक्सीडेंट मौजूद होता है जो लीवर को नुकसान होने से बचाता है। ये रस लीवर के अंदर वसा के संश्लेषण में सुधार लाता है और लीवर की कोशिकाओं के पुनर्जन्म को भी उत्तेजित करता है। चुकंदर को डिटॉक्स आहार के रूप में इस्तेमाल किया जाता है क्योंकि ये शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है।

एनीमिया दूर करे

 खून में हीमोग्लोबिन की कमी से एनीमिया रोग होता है और चुकंदर हीमोग्लोबिन के उच्च स्तर को बनाये रखने में सक्षम होता है। चुकंदर में पोटैशियम, जिंक, कैल्शियम, आयोडीन, मैग्नीशियम, फास्फोरस, सल्फर, ताम्बा, वसा और विटामिन बी 1, बी 2, बी 6, विटामिन पी और नियासिन पाए जाते हैं जिसके कारण एनीमिया का सामना करना चुकंदर के लिए काफी आसान हो जाता है।

कैंसर के इलाज में – 

अध्ययन बताते हैं कि चुकंदर का रस कैंसर के इलाज में भी सहायक होता है। कैंसर कोशिका ऑक्सीजन के उच्च स्तर पर खराब प्रतिक्रिया देती है और चुकंदर का रस कोशिकाओं द्वारा ऑक्सीजन का सेवन बढ़ाने में मदद करता है।

 

मधुमेह में राहत दिलाये – 

चुकंदर में अल्फा-लाइपोइक एसिड पाया जाता है जो एक ऐसा एंटी-ऑक्सीडेंट है जो ग्लूकोज के स्तर को कम करता है और इन्सुलिन संवेदनशीलता को बढ़ा देता है। ऐसे में चुकंदर का रस पीने से मधुमेह में काफी राहत मिल सकती है।

चुकंदर का रस पीने से हाई ब्लड प्रेशर और गठिया की समस्या में भी राहत मिलती है। इसके अलावा, बढ़ती उम्र के साथ स्मृति में कमी लाने वाले रोग डिमेंशिया के इलाज में भी चुकंदर का जूस काफी मददगार सिद्ध होता है।

चुकंदर के जूस के इतने सारे फायदों के बारे में अब आप जान चुके हैं इसलिए इन सर्दियों में चुकंदर का जूस जरूर पीजिये। बस इतना सा ध्यान रखिये कि चुकंदर का रस अगर ज्यादा पीया जाए तो शरीर में कैल्शियम की कमी हो सकती है और किडनी सम्बन्धी समस्या बढ़ सकती है इसलिए तो कहते हैं कि अगर संतुलित जीवन चाहते हैं तो आहार को संतुलित रूप में ही लीजिये।

 

 

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