बकरी की उपयुक्त प्रजाति

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भारत भर में बकरी पालन का व्यवसाय किया जाता है| बकरी पालन व्यवसाय से दूध, मांस,   खाद इस प्रकारके लाभ होते है| वैज्ञानिक रूप से देखा जाये तो बकरी का दूध विभिन्न विकारो  पर औषधि माना जाता है| इन बकरियों के प्रजातियों में कुछ जाती के बकरे का मांस स्वादिष्ठ होता है और कुछ बकरियों का दूध औषधि के तौर पर उपयुक्त माना जाता है|

  • दूध के लिए उपयुक्त प्रजाति :
  • जमनापारी- यह प्रजाति उत्तर भारत के गंगा, जमुना और चंबल नदी की घाटी में पायी जाती है| इस प्रजाति के बकरी का रंग सफ़ेद और उस पर तांबे जैसे रंग के बिंदु होते है| यह प्रजाति दूध और मांस दोनों के लिए उपयोगी है| इस बकरी के कान लम्बे और नाक तोते जैसी दिखती है, इस कारण यह बकरी दिखने में सुंदर और बहुतही आकर्षक है| बकरी का वजन ५०-६० किलो तक होता है और नर बकरे का वजन ६०-९० किलो का होता है| इस बकरी को एक बार एक ही मेमना होने का प्रचलन है, और इस बकरी की  दूध देने की क्षमता ५ लिटर तक की ही है| प्रसव काल में यह बकरी ६०० लिटर तक का दूध देती है और इस दूध में ३.-४ प्रतिशत स्निग्धांश चिकनाई होती है|
  • बीटल – यह प्रजाति ‘ अमृतसरी ‘ नाम से भी पहचाना जाता है| यह प्रजाति का मूल स्थान पंजाब, झेलम, अमृतसर, फिरोजपुर परिसर है| इसके शरीर का आकार छोटा है , और सिर ‘ जमनापारी ‘ जैसेही दीखता है , कान लंबे, यानि के खाने के पत्ते जैसे होते है| बकरी का वजन ४०-६० किलो, और नर बकरी का वजन ७०-९० किलो तक होता है| यह बकरी हररोज २-४ लिटर तक का दूध पांच महिने तक दूध दे सकती है|
  • बारबेरी – यह प्रजाति आफ्रिका में पायी जाती है| भारत में आग्रा और मथुरा जैसे प्रदेशो में पाई जाती है| इसका रंग सफ़ेद और बदन पर लाल अथवा तांबे जैसे बूंदे होते है | इस बकरी दूध अच्छा देती है और प्रजनन क्षमता भी अच्छी है| यह बकरी बारह से पंधरा महिने में जुड़वाँ मेमने को जन्म देती और हररोज एक से दो लीटर दूध देती है|
  • सुरती – यह प्रजाति गुजरात में सुरत शहर के आसपास और महाराष्ट्र में धुलिया, नासिक, जलगाव, मुंबई परिसर में पाई जाती है| यह आकर में छोटी होती है| यह बकरी सफ़ेद रंग की होती है| हररोज १-२ लिटर दूध देती है|
  • सिरोही /अजमेरी – राजस्थान के अजमेर प्रांत में यह बकरी पाई जाती है| इसका रंग इट के जिअसे रहता है| हररोज यह बकरी २-३ लीटर तक दूध देती है|

 

  • मांस के उत्पादन योग्य उपयुक्त प्रजाति
  • उस्मानाबादी – उस्मानाबाद, लातूर, नगर, बीड इन प्रान्त में यह बकरी पाई जाती है| यह बकरी बहुत मजबूत रहती है| हररोज एक से दो लीटर तक दूध देती है| मेमने को बकरी के दूध के साथ ही पोषण आहार, घास दे दिया जाये तो वजनमे अच्छी वृद्धि होती है|
  • मारवाड़ी- यह प्रजाति राजस्थान में पाई जाती है| इसकी रोग प्रतिकारक क्षमता अच्छी होती है| इसका रंग कला होता है| आकार में छोटी होती है| इस प्रजाति के नर बकरे की दाढ़ी होती है| मादी का वजन ३०-३५ किलो होता है | यह बकरी दूध और मांस उत्पादन के लिए उपयुक्त है|
  • संगमनेरी- यह प्रजाति नगर, पुणे जैसे जिलों में पाई जाती है| इसका रंग सफ़ेद और आकर मध्यम होता है| कई बकरियों के बदनपर काले, तांबे जैसे बुँदे होते है| यह प्रजाति दूध और मांस दोनों के लिए उपयुक्त है|

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