बकरियों का चयन और व्यवस्थापन

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बकरियों का चयन करने के लिए प्रारंभ से ही बकरी पालन का व्यवसाय करते समय अच्छी प्रजातियों का चुनाव करना चाहिए और इस क्षेत्र में सफलता पाने के लिए बकरियों का चयन यह सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है | दूध उत्पादन के लिए बकरीया पालना है या मांस उत्पादन के लिए इस पर बकरियों का चयन करना पड़ता है|

 बकरियों का चयन करते समय निम्न सावधानी बरतनी पड़ती है :

बकरी की मूल जाति मूल विशेषताएँ, आकार शारीरिक वृद्धि, नर या मादी, इन सब बातों को ध्यान में रखना पड़ता है | इसके साथ ही बकरी का सर, भाल प्रदेश की रचना ढाल प्रदेश की रचना, सिंग का आकर्षक होना, पतली गर्दन, सामने वाले पैर सीधे और चौडे, इन सब बातों का भी ध्यान रखना पड़ता है|

 मांस उत्पादन के लिए बकरियों का चयन :

भारत में बकरीयो की 24 जाति प्रख्यात है | इसमें से कुछ दूध के लिए तो कुछ खास तौर पर मांस उत्पादन के लिए प्रख्यात है | विगत दिनों में इससे ज्यादा तो मांस उत्पादन के लिए बकरी पालन व्यवसाय किया जाता है | मास के लिए बकरी का चयन करते समय स्थानिक हवामान, तापमान का ध्यान रखना बहुत जरूरी है | बकरियों की मुख्य प्रजातियों में उस्मानाबादी, बीटल, बारबरी और बंगाली प्रजाति नर और मादी का चयन करना भी महत्वपूर्ण बात होती है |

 सशक्त सक्षम मेमनों का चयन :

मांस उत्पादन के लिए जिस नवजात मैंमने का कुल भार ज्यादा रहता है | उनको चयनित करना चाहिए बकरी का वृद्धि दर और पहले बार उन्माद में आने की उमर अवस्था जुड़वा मेमने देने का अनुपात दो प्रसव काल का अंतराल यह सब बातें देखनी पड़ती है | क्योंकि यह सब गुणधर्म मेंमनो का वंश परंपरा से मिलता है |

 जुड़वा मेंमनो में से चयन :

मेमनो में जुड़वा बच्चे पैदा करने का अंश माँ बाप से आता है | इसीलिए जिस बकरी को ज्यादा से ज्यादा जुड़वा मैंने हो गए हैं, उसी में से मिलने को प्रजनन के लिए चुनना अच्छा होता है|

 नियमित प्रसव होनेवाली बकरी से चयन :

साधारण बकरियों में 5 महीने का गर्भकाल होता है एक बार बकरी ने प्रस्ताव कर मेमना दिया, तो उसके बाद तुरंत एक से डेढ़ महीने में फिर से उन्माद में आ जाती है | इस कारण डेढ ही साल में दो बार बकरी प्रसव हो जाती है | इस पद्धति से नियमित प्रसव होने वाली बकरी के मेमने को ही प्रजनन के लिए चयन करना चाहिए तो मैंमने भी नियमित रूप से प्रसव होते हैं और दीर्घकाल तक और मैंमने पैदा कर सकते हैं |

निरोगी स्वस्थ और व्यंग बकरी का चयन :

मांस उत्पादन के लिए वंशानुगत आधार पर बकरी का चयन करते समय वह पूर्णत: निरोगी, स्वस्थ और अव्यंग होनी चाहिए | उनमे कोई रोग हो तो उसका संक्रमण आगे की पीढ़ी में हो जाता है|

 नियमित रूप से प्रजनन:

भारतीय जाति की बकरियाँ साल में दो ऋतुओं में उन्माद पर आती है | बकरी का उन्माद पर आना ज्यादातर बाहर की ओर आस पड़ोस की उपस्थिति पर निर्भर होता है | ज्यादातर जून- जुलाई माह में बकरियों में उन्माद बढ़ता है | उन्माद का काल 30 से 3५ घंटे का होता है | इस वक्त प्रजनन के लिए जिस नर बकरे का चयन किया है उसे उपयोग में लाना चाहिए इससे गर्भधारणा नहीं हुई तो 21 दिन उन्माद आने के लिए राह देखनी पड़ती है|

आधुनिक तंत्र तंत्रज्ञान का प्रयोग:

आजकल आधुनिक तंत्रज्ञान के प्रयोग से बकरियों की उत्पादन क्षमता में वृद्धि बड़े पैमाने पर किया जाता है | इस की सभी जानकारी पशु चिकित्सालय में उपलब्ध होती है |

कृत्रिम प्रजनन:

सक्षम नर बकरी की जरूरत अच्छी और सकस जाती पैदा करने के लिए होता है| और इनका प्रभाव भी होता है| इस समस्या पर एक समाधान निकाला है | नैसर्गिक पद्धति से बकरी को बढ़ने के बजाय कृत्रिम पध्दती से प्रजनन किया जाता है | ज्यादातर इस पद्धति में उच्च गुणवत्ता के नर बकरे का ज्यादा से ज्यादा उपयोग किया जाता है | बकरी पालन व्यवसाय मांस उत्पादन के लिए मुख्यता किया जाता है | इसलिए अच्छी वजनी मांसल और तजेलदार बकरियों की निर्मिती करना बहुत ही अनिवार्य होता है, इसीलिए एक ही एक बकरे का प्रजनन के लिए उपयोग करने योग्य नहीं माना जाता कृत्रिम प्रजनन से विदेशी प्रजाति के जाति बंदर के माध्यम से सर्वोत्कृष्ट जाति की बकरियों की निर्मिति कर के उत्पादन की वृद्धि हो सकती है

 संकर करना :

कृत्रिम प्रजनन पद्धति से अथवा नैसर्गिक पद्धति से भी संकर कर सकते हैं | ज्यादा मांस देने वाली बकरियों का संकर किया तो आगे की पीढ़ी के मेंमनो से ज्यादा उत्पादन मिलने की संभावना रहती है | अत्याधुनिक पद्धति से ‘’बोअर’’ जाति संकर का कर दिया तो बकरियों का उत्पादन में बढ़ोतरी होने में मददगार साबित होता है | उस्मानाबादी बकरीयो का संकर बीटल से या बंगाली जाति से करना अच्छा रहता है |

 

भ्रूण प्रत्यारोपण:

यह अत्याधुनिक तंत्रज्ञान है | इस पद्धति का उपयोग उच्च कोटि की जाति का आरक्षण और संवर्धन करने के लिए किया जाता है | अनेक गर्भवती निर्मिती के लिए उच्च प्रति के माटी के घर का विभाजन किया जाता है | यह पद्धति बहुत ही खर्चिक और तंत्रज्ञान कौशल अत्यावश्यक होने वाली पद्धति है |

बकरियों को एक साथ उन्माद पर लाना:

बकरियों की प्रजनन अलग-अलग अवस्था में होती है | इन सबका एक साथ व्यवस्थापन करना और पालन, संगोपन करना, कठिन कार्य बन जाता है | बकरी पालक कार्य का बोझ कम करने के उद्देश्य से ऐसा किया जाता है | क्योंकि झुंड में ज्यादा से ज्यादा बकरियां एक साथ उन्माद पर लाने के लिए नए-नए तंत्रज्ञान का उपयोग किया जाता है | लेकिन यह बहुत खर्चिक होता है | आधुनिक तंत्रज्ञान पर अभ्यास कर के झुंड के ज्यादा से ज्यादा बकरियों को एक साथ उन्माद पर लाते हैं | मेमनो का उत्पादन बाजार में कौन-सी ऋतु में मांस को ज्यादा मांग है इसका अभ्यास करके बकरियों को उन्माद पर लाकर भर दिया जाता है इससे ज्यादा आमदनी भी आती है|

स्थानिक बकरियों का संगोपन :

संकर करने के बजाय स्थानिक जाति की बकरियों का संवर्धन करने पर बल दिया जाता है | इससे स्थानीय जाती जीवित रहने के लिए मदद मिलती है | इसी में उच्च प्रति की बकरी और नर बकरे को संवर्धन करने के लिए उनका प्रजनन शुरू करना जरूरी है |

 

बकरी पालन व्यवसाय में बरतने योग्य सावधानी:

  1. बढ़ते हुए मैंमने का नियमित तौर पर वजन नापना जरूरी है|
  2. नवजात मेंमनो को जितना जल्दी हो सके उतना जल्दी कच्चा दूध ज्यादा से ज्यादा पिलाना चाहिए|
  3. नवजात मेमनो का संगोपन करते वक्त मादी की आयु 1 साल और नर की 1 से 2 साल की होनी चाहिए|
  4. जुड़वा या उससे ज्यादा मेमनो को जन्म दिया हो तो उनकी विशेष देखभाल करनी चाहिए वह कुपोषित ना हो पोस्टिक आहार देकर प्रजनन के लिए उनका ही चयन करना चाहिए |
  5. हर साल झुंड में से सामान्यता 20% बकरिया निकालकर उनकी जगह नहीं बकरियां लानी चाहिए|
  6. बकरियों का बाडा साफ-सुथारा और सूखा, निर्जुतक रखना बहुत ही आवश्यक है| बाड़ा हवादार होना चाहिए जैसे कि हवा आती रहनी चाहिए क्योंकि इससे बकरियों का भी मन लगता है |
  7. बकरियों को नियमित रूप से अलग-अलग रोगों के प्रतिबंधात्मक टीके लगवाना जरूरी है और कृमि नाशक दवाइयां नियमित रूप से पिलानी भी जरूरी है|

यह बातें नहीं करनी चाहिए:

  1. छोटे मेमनो को आवश्यकता से ज्यादा हरीघास देना |
  2. उन्माद में आने वाले नर बकरों को बाड़े में मुक्त छोड़ देना |
  3. बाडे में मेमनो को उनके माँ के पास बार-बार मुक्त छोड़ना |
  4. बकरी अथवा मैंमने के नाक में तेल डालना |

 

 

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