धनिया

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धनिया ( Coriander) या कोथमीर भारतीय रसोई में प्रयोग की जाने वाली एक सुंगंधित हरी पत्ती है। मारवाडी भाषा में इसे धोणा कहा जाता है। सामान्यतः इसके पत्तो का उपयोग सब्ज़ी की सजावट और ताज़े मसाले के रूप में किया जाता है। इसके बीज को सुखाकर सूखे मसाले की तरह प्रयोग किया जाता है। धनिया 2 तरह की होती हैं देशी धनिया इसमें स्वाद और खुशबू ज्यादा होती है ये बाजारों में दिसम्बर से फरवरी तक ही खाने के लिए उपलब्ध होती है हायब्रीड धनि ये बाजारों में ज्यादा देखने को मिलती है लेकिन स्वाद ओर खुशबू में ज्यादा अच्छी नहीं होती।धनिया के कच्चे पत्तों में विटामिन A, C और K के गुण मौजूद है और इसके बीज में फाइबर, कैल्शियम, कॉपर, आयरन होता है।

धनिया कैसे उगायें :-

Coriander यानि धनिया सेहत के लिए फायदेमंद सब्जी है और घर में धनिया उगाना काफी आसान है। कहा जाता है कि दुनिया में ऐसा कोई पौधा नहीं है जिसमें कोई औषधीय गुण न हो। धनिया भी इनमें से एक है, तभी तो इसे सैकड़ों सालों से भारतीय भोजन में प्रयोग किया जा रहा है।

घर में धनिया कैसे बोये :-

  • धनिया एक 6-10 इंच का छोटा-सा पौधा होता है, इसे लगाना और देखभाल करना भी काफी आसान होता है।
  • एक चौड़ा गमला या फिर जमीन में पहले खर-पतवार हटा के साफ मिटटी भरें, गोबर की खाद या जैविक खाद मिला लें तो और भी अच्छा।अब इस मिटटी को गमले में भरने के बाद पानी डाल के नम कर लें।
  • अब धनिया के बीजों को फैला दें। ये बीज एक दूसरे से करीब 6-8 इंच दूर होने चाहिए। अब पूरे गमले में 0-5-1 सेंटीमीटर मिटटी की परत बिछा दें।
  • धनिया के पौधों में बराबर पानी डालना चाहिए पर ध्यान रखें कि इसे इतना पानी चाहिए कि नमी बनी रहे पर गीला न हो । एक स्प्रे बोतल से पानी का छिड़काव करें तो और भी बढ़िया।
  • 7-10 दिनों में अंकुर निकलने लगेंगे। जब पौधा 4-6 इंच बड़ा हो जाये तो आप इन्हें काट सकते हैं। ध्यान रखें कि एक बार में (1/3) एक तिहाई पत्ते से ज्यादा पत्ते न तोडें। इससे पौधा कमजोर नहीं होगा और तेजी से बढ़ता रहेगा।
  • इस प्रकारधनिया (Coriander) उगाकर आप अपने खाने में उपयोग करें। घर और बाज़ार की धनिया के स्वाद, महक और गुण में आप काफी अंतर महसूस करेंगे ।

 

धनिया के फायदे और नुकसान :-

धनिया तो लगभग सभी घरों में पाया जाता है। कुछ लोग हरा धनिया प्रयोग करते हैं तो कुछ हरा और सूखा दोनों। सूखे धनिये का प्रयोग मसाले के रुप में अधिक होता है और हरा धनिया का प्रयोग चटनी या सब्जी में डालकर प्रयोग में लाया जाता है। धनिया खाने का स्वाद बढाने के साथ कई रोगों को भी ठीक करने में मदद करता है।

इसलिए हम आपको धनिया के फायदे के बारे में आज यहां बताएंगे। धनिया का पौधा लगभग 30 सेंटीमीटर ऊंचा होता है और इसके पत्ते गोल कटे हुए और इसका फूल सफेद पत्रकार होते हैं। इसके फल छोटे-छोटे अंडाकार होते हैं जोकि सूखने पर दो भागों में बंट जाता है। इसका तना, पत्तियां, फूल, बीज सभी सुगंधित होते हैं।

फायदे :-

  • धनिया से बनाया हुआ तेल लगाकर मालिश करने से वात-विकार एवं दर्द शांत होता है। इसको तैयार करने के लिए कोई भी तेल लें (सरसों का तेल हो तो बेहतर है) और उसमें सूखा धनिया डालकर ५मिनट आग में रखकर गर्म कर लें। उसे आग से उतारकर ठण्डा कर लें और फिर इससे मालिश करें।
  • भोजन कोस्वादिष्ट एवं सुगंधित बनाने के लिए धनिया का प्रयोग मसाले के रूप में भी किया जाता है।
  • यदि किसी केशरीर में पित्ती आ गई है तो धनिया का रस लगाने से पित्ती शांत हो जाती है।
  • यदि नाक से खून निकल रहा है तो इसकी पत्तियों का रस नाक में डालने से खून निकलना बंद हो जाता है।
  • यदि पाचन खराब हैं तो आप धनिया और सोंठ का काढ़ा पिए, इससे पाचन शक्ति बढ़ती है।
  • धनिया और जीरे का शरबत पीने से शरीर की गर्मी शांत होती है। इसलिए इस पेय को गर्मियों के मौसम पीया जाता है जिससे लू लगाने का खतरा कम हो जाता है।
  • धनिया के चूर्ण से मुंहासों को पूरी तरह से खत्म किया जा सकता है ।
  • धनिया का काड़ा सर्दी और खांसी में काफी आराम पहुंचाता है। काड़ा बनाने के लिये 100 ml पानी में लगभग 20 ग्राम हरी धनिया (हरा धनिया न हो तो धनिया के बीज लें) के पत्ते डालकर थोड़ी देर उबालें। जब काढ़ा बन जाए (पानी 3/4 रह जाए) तो ठण्डा कर लें, लेकिन हल्का गर्म रहे तभी इसे पिलायें।
  • धनिया ठंडा होता है इसलिए एलर्जी को शांत करने के लिए बहुत ही अच्छा होता है।

नुकसान :-

  • धनिया के अधिक मात्रा में सेवन से एलर्जी की समस्या हो सकती है।
  • इसके सेवन से हमारी त्वचा के सनबर्न होने की सम्भावना बढ़ जाती है।
  • गर्भवती महिलाओं को धनिये का सेवन करने में सावधानी बरतनी चाहिए।

 

 

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