गुलदाउदी की व्यवसायिक उन्नत खेती – भाग – १

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गुलदाउदी एक शाकीय बहुवर्षीय शोभाकारी पौधा हैं, जिसे एस्टेरेसी कुल के अंतर्गत श्रेणीबद्ध किया गया हैं। यह शरद ऋतू का अत्यंत लोकप्रिय फूल हैं। इसके फूलों की बनावट, आकार, प्रकार और रंगों में इतनी अधिक विभिन्नता हैं शायद ही किसी अन्य फूल में हो। इसमें सुगन्ध नहीं होती, साथ ही फूलने का समय भी बहुत कम होता हैं, फिर भी इसके फूल की बनावट इतनी सुन्दर और आकर्षक होती हैं की हर कोई इसे देखकर मुग्ध हो जाता हैं।

इस फूल की विभिन्न किस्मों में चटकीले रंग तथा इसकी बनावट इसके साज श्रृंगार में चार चाँद लगा देती हैं। गुलदाउदी के फूलों में विभिन्नताओं के कारण ही इसे फूलों की रानी का ख़िताब प्रदान किया गया हैं।

इस फूल की उत्पत्ति स्थान चीन को मन जाता हैं विश्व फुष्प बाजार में 10 सर्वश्रेष्ठ फूलों में गुलदाउदी का नाम गुलाब के बाद दूसरे स्थान पर आता हैं।इसकी खेती विश्व के विभिन्न देशों जापान, चीन, अमेरिका, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, भारत व अन्य देशों में व्यवसाय के रूप में की जाती हैं।

इसके फूलों का उपयोग पूजा-पाठ, शादी व अन्य अवसरों पर किया जाता रहा हैं। इस पुष्प की गुणवत्ताओं को ध्यान में रखकर किसान इसकी खेती काफी बड़े स्तर पर कर रहे हैं।

 

जलवायु :-

गुलदाउदी प्रकाश व तापमान से अधिक प्रभावित होता हैं। प्रकाश अवधि वर्गीकरण के अनुसार गुलदाउदी की फसल के कर्तित पुष्प उत्पादन के लिए ग्रीनहाउस में जलवायु नियंत्रण हेतु निम्न घटकों का होना अति आवश्यक हैं। पौधे उगने के लिए दिन का तापमान 20-25 डिग्री सेंटीग्रेट व रात का तापमान 15-18 डिग्री सेंटीग्रेट एवं कार्बनडाइऑक्साइड गैस का स्तर 900-1200 पीपीएम और अपेक्षित आर्द्रता 60-75% रहना चाहिए।

फसल की प्राम्भिक अवस्था में वानस्पतिक बढ़वार हेतु कृतिम प्रकाश 2-3 सप्ताह तक 60 अथवा 100 वॉट के बल्बों से प्राप्त 100-150 माइक्रो मोल प्रकाश प्रति वर्गमीटर क्षेत्र में रात्रि में 6 बजे से 11 बजे तक मिलना चाहिए।

भूमि :-

गुलदाउदी खेती वैसे तो सभी प्रकार की मृदाओं में की जा सकती हैं लेकिन अच्छे जल निकास वाली बलुई दोमट मृदा, जिसका पीएच मान 6.2-6.5 के मध्य उपयुक्त रहती हैं।

किस्मों का चुनाव :-

किस्मों का चुनाव करते समय यह ध्यान देना होता हैं की पुष्प बाजार में किस प्रकार के गुलदाउदी की किस्मों की मांग हैं जैसे स्प्रे टाइप, स्टेंडर्ड टाइप आदि। कर्तित पुष्प हेतु गुलदाउदी के बड़े एवं मध्यम आकार के पुष्प वाली प्रजातियों का चुनाव करना चाहिए।

गुलदाउदी के पुष्प की माला बनाने के लिए अधिकांशतः छोटे आकार वाले पुष्पों की मांग हैं। यदि पुष्प के रंग की बात करें तो सबसे ज्यादा खपत सफेद और पिले रंग के पुष्पों की है। किस्मों की जानकारी सरणी में दी गई हैं।

बड़े फूल वाली या स्टेंडर्ड किस्में :-

इन किस्मों में एक बड़ा फूल लम्बी डंडी पर लगता हैं। स्नोबॉल, ब्यूटी, चन्द्रमा, महात्मा गाँधी, विलियम टर्नर, स्नोडेन व्हाइट, माउंटेनियर, सोनार बंगला, पूर्णिमा, इवनिंग स्टार, ब्राइट गोल्डन तथा चन्द्रमा इत्यादि।

छोटे फूल वाली या स्प्रे किस्में :-

इन किस्मों में बहुत छोटे-छोटे फूल एक डंडी पर लगते हैं। अजय, कुंदन, बीरबल साहनी, व्हाइट बुके, जया, पूजा, बसंती, क्रेकर जेक, ब्लू विनर, लेहमेंस, ननको, सोनाली, तारा इत्यादि।

प्रवर्धन :-

यह एक स्वतः प्रजनित बहुवर्षीय शाकीय पौधा हैं जो पुराने पौधे से नये पौधे को उत्पन्न करता हैं जिन्हे सकर्स के नाम से जाना जाता हैं इसके अलावा गुलदाउदी के पौधों को कटिंग के माध्यम से भी प्रवर्धित करते हैं।

सकर्स :-

इस विधि में गुलदाउदी के पौधे को जब उसका फूल मुरझाने लगता हैं, जमीन से लगभग 15-20सेमी. ऊपर से काट देते हैं इसके बाद जनवरी, फरवरी में पौधे की जड़ के पास से बहुत सी सकर्स निकलना प्रारम्भ हो जाती हैं, जिससे सावधानीपूर्वक निकालकर लगा देना चाहिए। तैयार सकर्स को फरवरी के तीसरे सप्ताह से लेकर मध्य मार्च तक तैयार क्यारियों में 20-25 सेमी. के अंतराल पर रोपित कर देना चाहिए।

कटिंग :-

कटिंग तैयार करने का सबसे सर्वोत्तम समय जुलाई-अगस्त हैं अथवा वातावरण में जब नमी हो उस समय शीर्ष भाग से कटिंग लेना चाहिए। उस समय इसका सम्पूर्ण रंग हरा होता हैं। एक आदर्श कटिंग 5-8 सेमी. लम्बी तथा व्यास 3.2 मीमी. होना चाहिये। कटिंग तैयार करते समय ध्यान रहे की नोड के 1 सेमी. निचे धार वाले चाकू से भली-भाती काट लेना चाहिए, कटिंग को फफूंदीनाशक (थाइरम) 0.2% घोल में डुबोकर उपचारित कर लेना चाहिए तत्पश्चात इंडोल ब्यूटारिक एसिड के 2000 पी.पी.एम. के घोल में कटिंग के निचले हिस्सों को 10 सेकन्ड तक उपचारित करने के पश्चात छायायुक्त स्थल में परयाणिकूलन हेतु कुछ देर तक छोड़ जाता हैं।

अब यह कटिंग रूटिंग मिडिया जिसमे दो भाग मिट्टी+1 भाग मोटा बालू+1भाग पत्ती की खाद को उथले बर्तन में भरकर उसमे लकड़ी से 5 सेमी. की दुरी पर छिद्र बनाकर लगा देनी चाहिए। उपरोक्त मिश्रण में कटिंग को लगाने से पूर्व 1-2% फारमैलीन से मिश्रण को उपचारित कर लेना चाहिए। ऐसा करने से कटिंग में लगने वाली बीमारी की संभावना समाप्त हो जाती हैं। जड़ों का विकास 2 सप्ताह के बाद शुरू हो जाता हैं जो की वातावरण की आपेक्षित आर्द्रता, तप एवं किस्म पर निर्भर करता हैं। जड़ युक्त कटिंग 3-4 सप्ताह में रोपित करने योग्य हो जाती हैं।

पौध की रोपाई :-

गुलदाउदी के पौधे की रोपाई अगस्त में कर सकते हैं पौधे की रोपाई पंक्ति से पंक्ति 20 से 30 सेमी. एवं पौधे से पौधे की 20 सेमी. करना उचित रहता हैं। प्रत्येक बेड में 2 या 3 पंक्तिया रखी जाती हैं। रोपाई के उपरांत बौछार द्वारा हल्की सिंचाई करें। पौध की रोपाई करने के 20-25 दिनों तक जारे के द्वारा हल्का पानी सुबह, दोपहर, शाम तीनो समय देना चाहिए।

सिंचाई :-

गुलदाउदी उथली जड़ों वाली फसल हैं इसमें जड़ के पास जल का जमाव होने से जड़े सड़ने का डर रहता हैं एवं अधिक मात्रा में पानी देने से पौधे भी मर जाते हैं। अतः जल निकास का उचित प्रबंधन होना चाहिए। पौधों को पानी की आवश्यकता का पता इसकी कोमल पत्तियों व शाखाओं की ताजगी खोने से लगाया जा सकता हैं।

पोषक तत्व :-

पोषण के लिए 20:20:20 के अनुपात में एन.पि.के. यानि नत्रजन, फॉस्फोरस, व पोटाश का घोल पानी के साथ दे और कली आने पर 150:150:150 पी.पी.एम. के अनुपात में नत्रजन, फॉस्फोरस व पोटाश की मात्रा का छिड़काव करें।

निराई एवं गुड़ाई :-

निराई एवं गुड़ाई दो प्रमुख एवं आवश्यक प्रक्रियाएं हैं जिन्हे फसल काल में गुलदाउदी की विभिन्न प्रजातियों को उगाने के लिए करना पड़ता हैं। पौधों की छोटी अवस्था में ही समय-समय पर निराई-गुड़ाई करते रहना चाहिए। ऐसा करने से खरपतवार नियंत्रण के साथ मिट्टी भी भुरभुरी बनी रहती हैं। जिससे जड़ों की अच्छी वृद्धि एवं विकास होता हैं।

अन्य देखरेख :-

पौधों और फूल के सही विकास के लिए पौधे को शुरू से लेकर फूलने तक सही ढंग से देख रेख करने की आवश्यकता होती हैं इसके लिए समय से खाद, पानी एवं निराई गुड़ाई के अलावा पिंचिंग, डिसबडिंग, डिससूटिंग एवं सहारा देने की आवश्यकता होती हैं।

पिंचिंग या शीर्षनोचन :-

शीर्षनोचन पौधों के फैलाव व बढ़ाने के लिए जिया जाता हैं। इस प्रिक्रिया में गुलदाउदी में जब पौधा 8-10 सेमी. का हो जाता हैं, तो ऊपर की 3-5 सेमी. शाखा को तोड़ देते हैं। पिचिंग स्प्रे टाइप गुलदाउदी से अधिक संख्या में फूल प्राप्त करने के लिए की जाती हैं।

 

 

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