कद्दू के लिए जलवायु और भूमि

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  1. कद्दू की खेती के लिए 18 से 30 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान और शीतोष्ण और समशीतोष्ण जलवायु उपयुक्त रहती है| अधिक या कम तापमान में इसकी पैदावार प्रभावित होती है| लेकिन इसको दोनों अवस्था में उगाया जा सकता है|
  2. इसको फसल के लिए अच्छी जीवांशयुक्त सभी प्रकार की मिट्टी में सफलतापुर्वक उगाया जा सकता है| लेकिन इसके लिए बलुई दोमट और दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त रहती है| जिसका पीएच मान 5.5 से 6.8 के मध्य होना चाहिए|

खेत की तैयारी और खाद उर्वरक (Farm Preparation and Fertilizer)

  1. इस फसल के लिए पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करनी चाहिए| इसके बाद 3 से 4 जुताई कल्टीवेटर या देशी हल से करनी चाहिए| ताकि मिट्टी भुरभुरी और हवा युक्त हो जाए, इसके बाद पाटा लगाकर खेत को समतल बना लेना चाहिए
  2. कद्दू (Pumpkin) की खेती के लिए दूसरी या तीसरी जुताई में 250 से 300 क्विंटल कम्पोस्ट या गोबर की गली सड़ी खाद डालनी चाहिए| ताकि खाद अच्छे से मिट्टी में मिल जाए| इसके बाद 120 किलोग्राम नाइट्रोजन, 80 किलोग्राम फास्फोरस और 60 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टेयर डालनी चाहिए| नाइट्रोजन की आधी मात्रा फास्फोरस और पोटाश की पूरी मात्रा आखरी जुताई में डालनी चाहिए| नाइट्रोजन की बची हुई मात्रा दो बार में डाले एक जब पौधों के 4 से 5 पत्ती बन जाए तब दूसरी फूलों के समय देनी चाहिए|

किस्में और बुवाई (Varieties and Sowing)

  1. कद्दू की किस्में इस प्रकार है, जैसे- पूसा विश्वास, पूसा विकास, कल्यानपुर पंपकिन- 1, नरेन्द्र अमृत, अर्का सूर्यमुखी, अर्का चन्दन, अम्ब्ली, सीएस- 14, सीओ- 1 व 2, काशी हरित और पूसा हाइब्रिड- 1 इत्यादि प्रमुख है| विदेशी किस्में बतरनट, ग्रीन हब्बर्ड, गोल्डन हब्बर्ड, गोल्डन कस्टर्ड, यलो स्टेट और भारतीय में पैटिपान प्रमुख है|
  2. इसकी बुवाई जायद यानि की ग्रीष्मकालीन फरवरी मार्च में की जाती है| और खरीफ यानि की वर्षा ऋतू की बुवाई जून से जुलाई तक की जाती है| इसके लिए 45 से 55 सेंटीमीटर चौड़ी, 25 से 30 सेंटीमीटर गहराई और 3 से 4 मीटर दुरी पर पूर्व से पश्चिम दिशा की नालियां बनानी चाहिए| और पौधे से पौधे की दुरी 65 से 75 सेंटीमीटर रखनी चाहिए|
  3. इसकी बुवाई के लिए 5 से 6 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर पर्याप्त रहता है| जिसको 2 ग्राम बाविस्टिन या कैप्टान प्रति लीटर पानी की दर से 4 से 5 घंटे बीज को भिगोने के बाद छाव में सुखाने के बाद बुवाई करनी चाहिए|

 

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