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शेतीपुरक उद्योग

दुग्धोत्पादन उद्योग – क्रिम सेपरेटर व बॅच पाश्चरायझर

क्रीम सेपरेटर यंत्र
दुधाची किंमत स्निग्धांशावर किंवा मलईवर अवलंबून असल्याकारणाने दुधाचे अर्थकारण स्निग्धांशाच्या भोवतीच फिरते, म्हणून दुधातील स्निग्धांश कसा वाचविता येईल व अधिक फायदा कसा घेता येईल, याकडेच सर्व दुग्धप्रक्रिया

गुलाबापासून गुलकंद

गुलकंद हा गुलाबपाकळ्या आणि खडीसाखर याचे मिश्रण करून तयार झालेला पदार्थ आहे. घरच्या घरी आपण हा पदार्थ तयार करू शकतो. या पदार्थास आयुर्वेदात फार महत्व आहे. गुलाबशेती करणाऱ्यांसाठी तसेच बेरोजगारांसाठी गुलकंदनिर्मिती हा एक जोडधंदा किंवा

लाख से बनें लखपति

लाख, केरिया, लक्का, नामक कीट से उत्पादित होने वाली एक प्राकृतिक राल है। यह कीट पोषक वृक्ष के कोमल शाखाओं से रस चूसकर भोजन प्राप्त करते हुए, अपनी सुरक्षा हेतु राल का स्त्राव कर कवच का निर्माण करते हैं, जो हमें लाख के रूप में प्राप्त होती

बछड़ों के लिए खीस / बछडा प्रबंधन

खीस पशु के ब्योने के बाद थन से प्राप्त होने वाला पहला पदार्थ है, जिसमें रोग प्रतिरोधक गुण होते हैं। यह नवजात बछड़े को बीमारियों से बचाने के लिए आवश्यक है। महत्वपूर्ण बात यह है कि खीस को शरीर बहार का दसवां भाग जल्दी से जल्दी बछड़े को

पशुओं में खुर का बढ़ना

पशुओं में खुर का बढ़ना एक सतत, प्राकृतिक प्रक्रिया है। जो पशु चलायमान होते है, उनके खुर घीसते रहते है। जिससे खुर अपने उचित आकार में बने रहते हैं। परन्तु दिन प्रति दिन घटते चारगाह, असंतुलित पशुपालन, शहरों में छोटे से छोटे स्थान पर बाँध कर

पशुओं को दवा देने की विधियाँ

पशुओं को निम्नलिखित विधियाँ से दवाएं दी जा सकती है –

I. मुंह के द्वारा दवा पिलाना – अधिकांश औषधियां पानी अथवा तेल में मिलाकर पशु के मुख द्वारा पिलाई जाती है।

II. दवा चटाना (चटनी के रूप में) – कई दवाइयां ऐसी होती है, जिनको कि पशु को



पशुओं के बांझपन रोग तथा उनका बचाव व उपचार

दुधारू पशुओं ने प्रजनन संबंधी कई प्रकार की समस्याएं होती है। इन समस्याओं में (1) पशुओं बाँझपन का होना (2) उनका ऋतु चक्र में न आना (मदहीनता) (3) उनकी ऋतुकाल का कमजोर होना (मदमदता) (4) उनका सामान्य से छोटा अथवा बड़ा ऋतुकाल का होना (5) उनमें

पशुओं की प्राथमिक चिकित्सा

परिचय
प्राथमिक पशु चिकित्सा का उद्देश्य दुर्घटनाग्रस्त पशु की कुशलतापूर्वक सहायता करना है जिससे उसका दर्द कम हो और पशु चिकित्सक के आने तक उसकी दशा और ख़राब न हो। कभी – कभी पशु पशु अचानक दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं जिससे अत्यधिक खून निकला,

रेशीम किटकांवर येणारे रोग व त्यांचे नियंत्रण ( भाग – १)

बहुतांश शेतकरी बांधव शेतीस एक पूरक व्यवसाय म्हणून रेशीम उद्योग करतात. हा उद्योग चांगली आर्थिक उन्नती साधू शकतो. परंतु, हा उद्योग करतांना खूप साऱ्या श्रमाची आणि काळजीची गरज आहे. ह्या उद्योगात नेहमी भेडसावणारा प्रश्न म्हणजे रेशीम किटकांवर

कुक्कुटपालन – हिवाळी व्यवस्थापन

कृषी व्यवस्थेत शेती सोबत केला जाणारा महत्वाचा जोडधंदा म्हणून कुक्कुटपालन ओळखले जाते. हवामानानुसार कुक्कुट पक्षांच्या व्यवस्थापन यंत्रणेत बदल करणे आवश्यक आहे. ह्या लेखातून आपण जाणून घेवू हिवाळ्यात कोंबड्यांचे व्यवस्थापन कसे करावे ?  1)