काजू की खेती से संबंधित प्रश्नोत्तरी

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1. काजू के बगीचे किस तरह की मिट्टी में लगाया जा सकता है?

काजू की फसल को गहरी काली मिट्टी एवं ऐसी मिट्टी जहाँ पानी भर जाता है को छोड़कर हर तरह की मिट्टी में लगाया जा सकता है। काजू की फसल को पड़ती भूमि पर भी लगाया जा सकता है। अत: बैतूल जिले की लालबर्री जमीन जिस पर ज्‍यादातर व्‍यवसायिक खेती नहीं की जा रही है काजू के लिये बहुत ही उपयुक्त है।

2. काजू की फसल हेतु किस तरह की जलवायु उपयुक्त है?

बैतूल जिले में सभी विकासखण्ड की जलवायु काजू रोपण के लिये उपयुक्त हैं। ऐसे स्‍थानों पर जहाँ ठण्‍ड में तापमान दिनभर लंबे समय तक 12-15 डिग्री सेंटीग्रेड से कम रहता है ऐसे स्‍थानों पर काजू के बगीचे न लगवाये जायें। अत्‍यधिक ठण्‍ड एवं पाले की स्‍थिति में सुरक्षात्‍मक उपाय के रूप में नवीन पौधों को घास-फूस, कचरा या टाट के बोरे आदि से ढकने का प्रबंध करें। शाम को अनिवार्य रूप से सिंचाई करें तथा सुबह-सुबह कचरा जलाकर धुआँ करें। गौ मूत्र का छिंडकाव भी लाभदायक होता है।

3. क्या बिना सुनिश्चित सिंचाई के काजू की खेती की जा सकती है?

काजू की खेती में बहुत ज्यादा सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती है, लेकिन काजू रोपण के पश्चात प्रारंभ के 02 वर्षो तक नियमित सिंचाई करना आवश्यक होता है। गर्मी में कम से कम 15 दिवस के अंतराल पर माह में 02 बार सिंचाई अवश्य करें।

4. काजू के बगीचों का रोपण किस तरह किया जाए

काजू रोपण के लिये 1X1X1 मीटर आकार के गड्ढे होना चाहिए। प्रति गडढे में 10 किलो गोबर खाद डालना चाहिए। दीमक का प्रकोप होने पर हींग का छोटा सा टुकड़ा, नीम केक या दीमकनाशक का प्रयोग करना चाहिए। पौधों के अच्छे विकास हेतु नीम खली 10 किग्रा. प्रति पौधा का उपयोग करें। विभाग की योजना अंतर्गत सामान्य दूरी पर 7X7 मीटर की दूरी पर 200 पौधे प्रति हेक्टेयर रोपित किया जाना है। वर्षा ऋतु के पश्चात माह सितम्बर में रोपण किया जाना है। पात्र हितग्राहियों को उद्यानिकी विभाग द्वारा काजू के ग्राफ्टेड पौधे प्रदाय किये जाते है, जिसकी राशि का समायोजन कृषक की अनुदान राशि से किया जाएगा।

5. काजू का उत्पादन कितने वर्ष में प्राप्त होगा?

उचित प्रबंधन एवं ड्रिप के साथ खेती करने पर काजू का उत्‍पादन प्रथम वर्ष से ही लिया जा सकता है। प्रथम वर्ष में प्रति पौधे के 1-1 पुष्पगुच्छ से ही उत्पादन लिया जायें। ड्रिप के साथ काजू रोपण पर प्रति पौधा 250 ग्राम तक फलन लिया जा सकता है तथा द्वितीय वर्ष में प्रति पौधा 1-1.5 किलो तक उत्पादन ले सकते है। आगामी वर्षो में उत्पादन लगातार बढ़ता जाता है एवं 6-7 वर्ष पश्‍चात व्यवसायिक उत्‍पादन प्रति पौधे से न्यूनतम 10 किलो कच्‍चा काजू प्राप्त होता है। समय के साथ उत्‍पादन बढ़ता रहता है एवं उचित प्रबंधन करने पर एक पेड़ से अधिकतम 35 किलो तक उत्‍पादन लिया जा सकता है। काजू की फसल से काजू नट के अलावा, काजू एप्‍पल भी प्राप्‍त होता है जिससे ज्‍यूस, सिरप, फैनी, जैम, कैडी एवं अन्‍य उत्‍पाद भी बनाये जाते है। काजू नट कवचद्रव्‍य या सी.एन.एस.एल का उपयोग वार्निश जैसे कई उद्योगों में किया जाता है।

6. क्या काजू के बगीचे के साथ अन्य फसलें भी बोई जा सकती हैं?


पौध रोपण के प्रारंभ में 5 वर्षों तक अंतरवर्तीय फसल के रूप में अन्‍य फसल लगायी जा सकती है, किसानों को दलहनी फसल लगाये जाने की समझाईश दी जाती है। पौधों की कतार से दोनों ओर 50-50 से.मी पट्टी छोड़ने पर दो कतारों के बीच बची शेष भूमि में अन्तवर्तीय फसल के रूप में अन्य फसलें ली जा सकती है। बागान बड़े होने पर छाया में लगने वाली फसलें जैसे हल्दी/अदरक/अरबी की व्यवसायिक खेती कर किसान दोहरी आमदनी प्राप्त कर सकते है।

7. उत्पादन के बाद काजू कहाँ बेचा जा सकता है?

जिले के घोड़ाडोंगरी विकासखण्ड में काजू की प्रोसेसिंग इकाई पूर्व से ही स्थापित है। वर्तमान में पूर्व में लगे बगीचों से उत्‍पादित कच्‍चा काजू गुणवत्‍ता अनुसार 80 से 120 प्रति किलो की दर से विक्रय किया जा रहा है। काजू का उत्पादन बढ़ने पर उद्यानिकी विभाग के द्वारा काजू विक्रय हेतु क्रेता-विक्रेता सम्मेलन आयोजित किया जावेगा, जिससे किसानों को उच्‍चतम मूल्य प्राप्‍त हो सके। काजू वैज्ञानिकों के द्वारा जिले में उत्पादित काजू की गुणवत्‍ता अनुसार यह अवगत कराया है कि उचित प्रबंधन करने पर बैतूल में उत्पादित काजू आसानी से 125-150 रूपये प्रति किलो की दर से विक्रय किया जा सकता है।

8. क्या काजू पौधरोपण हेतु उद्यानिकी विभाग की कोई योजना है?
उद्यानिकी विभाग द्वारा काजू पौधरोपण हेतु अनुदान का प्रावधान है। विभागीय योजनान्तर्गत 7X7 मीटर पर काजू पौध रोपण करने पर प्रथम वर्ष में राशि रूपये 12000/-, द्वितीय वर्ष में राशि रूपये 4000/- एवं तृतीय वर्ष में राशि रूपये 4000/- की दर से तीन वर्षो में कुल राशि रूपये 20000/- का अनुदान प्रति हेक्टर पौध जीवितता क्रमशः 75, 90 एवं 100 प्रतिशत पाये जाने पर दी जाती है। काजू रोपण के साथ ड्रिप लगाना अनिवार्य है, ड्रिप लगाने के लिये विभाग की योजनांतर्गत 50 से 65 प्रतिशत तक अनुदान का प्रावधान है।

उद्यानिकी सन्देश-खेती में स्वच्छता अभियान

9. लाभ लेने की अधिकतम सीमा क्या है?

उद्यानिकी विभाग की पौधरोपण योजना हेतु प्रति कृषक 0.250 हेक्टेयर से लेकर 4 हेक्टेयर तक की सीमा तक अनुदान का लाभ प्राप्त कर सकते है।

10. योजना का लाभ लेने की क्या प्रक्रिया है
योजना का लाभ लेने के लिए उद्यानिकी विभाग के विकासखण्ड या जिला कार्यालय में सम्पर्क कर आवेदन प्रस्तुत करें, सीधे ऑनलाइन आवेदन भी कर सकते हैं। ऑनलाइन पोर्टल MPFSTS पर ऑनलाइन पंजीयन कर प्राप्त आवेदन के आधार पर पात्रता अनुसार लाभ दिया जाता ह।

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